किसानों के साथ कृषि विभाग को भी बड़ा झटका लगा है। चित्रकूटधाम मंडल में कई वर्षों के बाद अबकी लक्ष्य से ज्यादा रबी फसल बोई गई थी। किसान खुश थे कि उन्हें काफी अरसे के बाद खेती-किसानी का सुख मिलेगा।
कृषि विभाग को उम्मीद थी कि लक्ष्य से ज्यादा उत्पादन होने पर शासन से शाबासी मिलेगी। मंडल के चारों जिलों में 9,28,174 हेक्टेयर बुआई का लक्ष्य रखा गया था। इसके विपरीत बुआई 9,47,083 हेक्टेयर में की गई। यह लक्ष्य का 102 फीसदी था।
बरसात के दिनों में बारिश ठीक-ठाक हुई। ठंड भी अनुकूल रही। हालात खेती के माफिक होने से किसानों ने उम्मीदों और जोश के साथ रबी की जमकर बुआई की। गेहूं, जौ, मक्का, चना, मसूर, मटर का चारों जिलों में बुआई का लक्ष्य 8,77,673 हेक्टेयर था, लेकिन इससे ज्यादा 8,96,164 हेक्टेयर में इन फसलों की बुआई की गई।
इसी तरह तिलहन फसलों में पूरे मंडल में बुआई का लक्ष्य 50,501 हेक्टेयर था। इसके विपरीत बुआई 50,919 हेक्टेयर में हुई। चारों जनपदों में दलहन और तिलहन तथा धान्य फसलों का लक्ष्य 9,28,174 हेक्टेयर रखा गया था, लेकिन बुआई इससे कहीं ज्यादा 9,47,083 हेक्टेयर में हुई।
पिछले करीब दो महीनों तक सब कुछ ठीक-ठाक रहा। फसलें तेजी से परवान चढ़ रही थीं। गेहूं, चना, अरहर, सरसों, मसूर आदि के खेत लहलहाने लगे थे। इसी बीच प्रकृति रूठ गई। फरवरी का सूरज ढलते ही मौसम ने पलटी मारी और अचानक दो दिनों तक ओलावृष्टि और बारिश हुई। चारों जिलों में लहलहा रही फसलों को भारी नुकसान पहुंचा।
प्रशासन का सर्वे कुछ भी हो, पर किसानों का आंकलन है कि 50 से 75 फीसदी तक रबी की फसल खत्म हो गई है। लक्ष्य से ज्यादा बुआई पर खुश हो रहे किसान और कृषि विभाग अब सदमे में है। किसानों को बीज तक के लाले पड़ सकते हैं। पशुओं के लिए चारा भी दूभर होगा।
फिलहाल बुंदेलखंड के किसान केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। उन्हें सरकारों से कुछ मदद और राहत की दरकार है।
रिकार्ड बुआई हुई चित्रकूटधाम मंडल में
चित्रकूटधाम मंडल में इस वर्ष गेहूं की रिकार्ड बुआई हुई। बांदा में 1,65,179 हेक्टेयर, चित्रकूट में 53,210 हेक्टेयर, हमीरपुर में 1,12,035 हेक्टेयर और महोबा में 72,205 हेक्टेयर मेें गेहूं बोया गया।
इसी तरह चना बांदा 98,780, चित्रकूट में 48,150, हमीरपुर में 83,853 और महोबा में 61,950 हेक्टेयर में बोया गया। मसूर बांदा में 44,125, चित्रकूट में 22,390, हमीरपुर में 29,654 और महोबा में 35,550 हेक्टेयर में बोई गई।
सरसों बांदा में 3680, चित्रकूट में 4148, हमीरपुर में 15,680 और महोबा में 7220 हेक्टेयर में बाई गई है। मटर बांदा में 5580, चित्रकूट में 495, हमीरपुर में 15,720 और महोबा में 33,250 हेक्टेयर में बुआई की गई।