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क्वारंटीन प्रवासी मजदूर की संदिग्ध हालात में मौत

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बदौसा। हैदराबाद से लौटने पर क्वारंटीन किए गए प्रवासी मजदूर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। कहा जा रहा है कि क्वारंटीन मजदूर साथियों के साथ वह जंगल में शिकार करने गया था। वहां मांस-मदिरा के इस्तेमाल के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रास्ते में मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मौत फूड प्वायजनिंग से हुई है। मृतक की कोई सैंपलिंग नहीं होगी।
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बदौसा थाना क्षेत्र के दुबरिया गांव के मजरा महुराई का राजबहादुर पटेल (45) पुत्र सुंदर पटेल तीन माह पूर्व रोजी-रोटी की तलाश में हैदराबाद गया था। वहां आइसक्रीम बेचता था। लॉकडाउन के बाद 24 अप्रैल को अकेले लौट आया। ग्राम प्रधान ने उसे गांव के प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर में रोककर 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया। राजबहादुर की थर्मल स्क्रीनिंग की गई थी। इसमें उसके शरीर का तापमान सामान्य से अधिक था।
गुरुवार को राजबहादुर कई साथियों के साथ पड़ोसी गांव बरकतपुर चला गया और वहां जंगल में शिकार कर पड़ोसी जिले चित्रकूट के अमिलिहा के कट्टी पुरवा पहुंच गया। बताते हैं कि वहां साथियों के साथ मांस खाया और शराब पीया। देर रात वापस महुराई क्वारंटीन सेंटर आ गया। कुछ देर बाद उसके पेट में दर्द हुआ और हालत बिगड़ गई। नजदीक में ही स्थित घर से लोग आए और अतर्रा सीएचसी ले गए। वहां से डाक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मृतक अपने पीछे पत्नी गोमती के अलावा 10 वर्षीय पुत्र विनय और 8 वर्षीय पुत्री दिशा छोड़ गया है।
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एसडीएम जेपी यादव और सीओ टीपी द्विवेदी तथा थानाध्यक्ष बदौसा मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सीएमओ कार्यालय के एपिडेमोलॉजिस्ट डॉ. प्रसून का कहना है कि राजबहादुर की क्वारंटीन अवधि पूरी हो चुकी थी। उसकी मौत फूड प्वायजनिंग से हुई। कोरोना की सैंपलिंग नहीं होगी। शुक्रवार शाम तक शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। हालांकि शव मेडिकल कालेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस पहुंच चुका था।
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