शहर का इकतौले प्राइवेट बस अड्डा या दलदल का अड्डा।
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बांदा। शहर का इकलौता प्राइवेट बस अड्डा बारिश में भीषण दलदल और दुर्गंध में बदल गया है। यात्रियों को बसों में चढ़ना और उतरना बेहद जोखिम भरा है। नाक में कपड़ा रखना मजबूरी बन गया है। संक्रामक बीमारियों का पूरा खतरा मंडरा रहा है। यहां रात को ठहरने वाले बसों के चालक और परिचालक अक्सर डायरिया के शिकार हो रहे हैं। ईदगाह के पास स्थित प्राइवेट बस अड्डा काफी पुराना है। ग्राउंड पूरी तरह कच्चा है। नगर पालिका यहां सफाई की व्यवस्था भी नहीं किए हुए है। बारिश में जल निकासी पर्याप्त न होने से पानी भर जाने के बाद बसों के चक्कों से भीषण दलदल पैदा हो गया है।
पिछले एक पखवारे से यही हालात हैं। बस मालिकों, चालकों और परिचालकों ने बताया कि कई बार नगर पालिका से आरजू-मिन्नत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिला, पुरुष और बूढ़े यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशान हो रही है। अक्सर बच्चेे, बूढ़े या महिला यात्री दलदल में गिरकर कीचड़ से सराबोर हो रहे हैं। बस चालक रईस बेग सहित कल्लन यादव, नरेंद्र सिंह, विमल सिंह और गुड्डन आदि ने बताया कि बस अड्डे के अंदर मंदिर है। इसमें भी श्रद्धालु नहीं आ पा रहे। सावन में यहां भंडारा होना है। सफाई नहीं हुई तो संक्रामक बीमारी फैलने का पूरा अंदेशा है। उधर, नगर पालिका परिषद के सफाई निरीक्षक एचएस निरंजन ने बताया कि कल सोमवार को जेसीबी और सफाई कर्मी लगाकर प्राइवेट बस अड्डा परिसर की जितनी संभव होगी सफाई कराई जाएगी।