हाजी जी की दुकान में रंग और पिचकारियां खरीदते ग्राहक।
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बांदा। होली सिर्फ रंग ही नहीं बिखेरती। बांदा में तो यह सांप्रदायिक सौहार्द का रंग का गुल भी खिलाती है। कौमी एकता का रंग बिखेरने के लिए शहर के सबसे पुराने रंग विक्रेता ‘हाजी’ ने रंग-बिरंगे रंग और पिचकारियां दुकान पर सजा ली हैं। खरीददारों की भीड़ उमड़ रही है।
शहर कोतवाली के सामने स्थित ‘हाजी हफीजुर्रहमान’ की दुकान का रंग और पिचकारियों से सज गई है। ग्राहक भी खूब आ रहे हैं। ‘हाजी जी’ के हाथों रंग और पिचकारी खरीद रहे हैं। हिंदू-मुसलिम एकता का यह बेहद सुखद और नायाब नजारा है। कई दशकों पुरानी ‘हाजी जी’ की इस दुकान में ग्राहकों को पूरा भरोसा है।
मोलभाव को लेकर किसी ग्राहक को कोई शिकवा नहीं। कई दिनों से ग्राहकों से घिरे दुकान संचालक हाजी हफीजुर्रहमान बताते हैं कि होली पर 10 कुंतल रंग वह अपने हाथों से बेचेंगे। खरीददार सबके सब हिंदू भाई होंगे। हिंदू-मुसलिम एकता का यह रंग होली में हर साल चेहरों पर साफ नजर आता है।
हाजी हफीज बताते हैं कि हरबल रंग की मांग ज्यादा है। यह लगभग 400 रुपये किलो बिकता है। जबकि पानी वाले फ्लोरा रंग 600 रुपये किलो के भाव है। हरबल रंगों के शौकीन गिने-चुने हैं। यह बमुश्किल 20 किलो बिक पाता है। ‘हाजी’ की दुकान में पिचकारियां भी सजी हुई हैं। चाइना स्प्रे से रंग की बौछार होगी। 200 मिलीलीटर का स्प्रे 30 रुपये और 1000 मिलीलीटर का चाइना स्प्रे 80 रुपये का है।