बांदा। हजरत मिस्कीन शाह वारसी के 98वां सालाना उर्स के तीसरे व अंतिम दिन महिफले समां हुई। रात भर कव्वालों के कलाम गूंजते रहे। बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। लोगों ने भी लंगर व व्यवस्था संभाली। उर्स के तीसरे दिन बुधवार की देर शाम चादर जुलूस नरैनी रोड स्थित वारसी की मजार पहुंचा। रात को दरगाह मुतवल्ली कसीमुद्दीन वारसी के गूलरनाका स्थित आवास में महफिले समां में खानकाही कमाल पेश किए गए।
मजार में अकीदतमंदों ने फातेहा व लंगर कराया। दरगाह परिसर में रात भर कव्वालियां पेश की गईं। कव्वाल शहजादे, वकील साबरी, वकील जहांगीरी (बेलाताल), सईद फरीदी (टीकमगढ़), कसीम वारसी (इलाहाबाद), राजू मुरली (शाहजहांपुर) आदि ने कलाम पढ़े। गुरुवार को सुबह चिरागा व फातेहा के साथ उर्स का समापन हो गया। मुल्क की सलामती व आपसी सौहार्द कायम रखने को दुआ भी हुई। सभी को तबर्रुख (प्रसाद) बांटा गया। इस मौके पर एहरामपोश अलहाज तगय्युर शाह वारसी (कानपुर), शोहराब शाह वारसी (खंडेहा, मऊ), मुन्ने शाह वारसी (लखनऊ), मकसूद शाह वारसी (मिर्जापुर), जमाल शाह वारसी, मुनव्वर शाह, हसीन शाह, अजमल शाह, कमर शाह, राहिल शाह, बेनजीर शाह, शराफत शाह, मलामत शाह समेत कार्यकर्ता शमीम वारसी, कलामुद्दीन, मनीष गुप्ता वारसी, रामायण वारसी, इसराइल, सलीम वारसी, अली हसन, राशिद वारसी, अल्लारक्खू वारसी , नरेश द्विवेदी वारसी, राहुल सक्सेना वारसी ने व्यवस्था संभाली। कौमी एकता वारसी अकादमी अध्यक्ष अनीस वारसी व उपाध्यक्ष नजरे आलम शामिल रहे। दरगाह मुतवल्ली कसीमुद्दीन वारसी व हसन वारसी ने सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया।