एप्प द्वारा –-
बहन की शादी की पूंजी भी गवाई
बाँदा। बहन की शादी की जमा पूंजी भी गंवाई प्रवासी मजदूर संजय कुमार (बड़ागांव) का कहना है कि लॉकडाउन के सफर ने जीवन का असली रंग दिखा दिया। हर चीज के लिए मोहताजगी थी। महानगर इस आस से गए थे कि पेंटिंग करके जो कमाएंगे उससे इस वर्ष बहन की शादी कर देंगे। न कमाई रही, न पैसा। बहन की शादी के लिए जमा पूंजी भी हो गई खत्म। यात्रा शुरू करने से पूर्व उसके पास बमुश्किल 900 रुपए थे। गांव में ही रहकर कमाएगा। सालभर तक महानगर नहीं जाएगा।