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बांदा। बोरीवली (महाराष्ट्र) से अपने गृह जनपद बांदा पहुंचे प्रवासियों ने 16 दिनों के सफर में भूख, बेबसी, लाचारी देखने को मिला। बड़ागांव और पैलानी के शिवप्रसाद, रामआसरे, देवीदयाल और संजय रैदास बताते हैं हर जगह उन्होंने मदद मांगी। आगरा एक्सप्रेस-वे में सड़क हादसे में घायल प्रवासियों को सुरक्षित निकालने के लिए की मदद में पीछे नहीं रहे। -
प्रवासी मजदूरों की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी।------------------
फोटो- शिवप्रसाद -
पैलानी के शिवप्रसाद ने बताया कि घर लौटने के लिए उन्हें हर वो काम करना पड़े, जिसके लिए कभी सोंचा नही था। लॉकडाउन में एसी फैक्ट्री बंद होने पर मालिक ने तनख्वाह नहीं दी। शिवाजी नगर में पड़ोसियों से भीख की तरह मदद मांगकर 1600 रुपए जुटाए। तब घर वापसी की हिम्मत आई।