बघोलन तिराहे पर डकैतों द्वारा तोड़ा गया शहीद स्मारक।
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बांदा/बदौसा। दस्यु सरगना बलखड़िया की मौत के बाद भी शायद उसका खौफ बाकी है। यही वजह है कि आधा दर्जन युवा एसटीएफ जवानों के शहीद स्थल पर बनाए गए स्मारक को दस्यु बलखड़िया द्वारा दिनदहाडे़ ढहाने के तीन वर्षों बाद भी पुलिस स्मारक का दोबारा निर्माण नहीं करा सकी। यह आज भी खंडहर के रूप में पड़ा हुआ है। 21 सितंबर को इसकी याद ताजा हो गई।
23 जुलाई 2007 को पाठा के जंगल में कई डकैतों को मार गिराने के बाद देर रात दो वाहनों पर लौट रही एसटीएफ टीम पर फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन तिराहे पर पहले से घात लगाए बैठे दस्यु सरगना ठोकिया और उसके गिरोह ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। आगे चल रहे वाहन के जवान तो बच निकले लेकिन पीछे चल रहा वाहन कीचड़ में फंसने से आगे नहीं बढ़ सका और उस पर सवार एसटीएफ के आधा दर्जन युवा जवानों को ठोकिया गिरोह ने गोलियों से भून डाला। शहीद होने वाले जवानों में जीप चालक ईश्वर देव सिंह समेत राजेश चौहान, बृजेश यादव, लक्ष्मण प्रसाद, गिरीशचंद्र नागर और उमाशंकर यादव शामिल थे।
शहीदों की याद में पुलिस ने इसी स्थल पर स्मारक निर्माण कराया था। हालांकि इसके लिए चंदा ग्रामीणों ने जुटाया था। 29 अक्तूबर 2012 को तत्कालीन डीआईजी पीके श्रीवास्तव ने स्मारक का लोकार्पण किया। उस समय बांदा के पुलिस अधीक्षक पद पर मौजूदा डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी थे। वह भी लोकार्पण समारोह में शरीक थे। लेकिन इसके ठीक 11 महीने बाद 21 सितंबर 2011 को दस्यु सरगना बलखड़िया ने दिनदहाड़े धावा बोलकर जेसीबी मशीन से स्मारक को तहस-नहस कर दिया। साथ ही धमकी दी कि दोबारा स्मारक बनाया तो अगली बार गिरोह थाना ढहा देगा।
बलखड़िया की इस धमकी का पुलिस पर कितना असर पड़ा यह तो नहीं पता? लेकिन पुलिस ने फिर आज तक स्मारक पुनर्निर्माण की जरूरत नहीं समझी या फिर हिम्मत नहीं जुटाई। हालांकि ढहाने के दूसरे दिन रातों-रात कड़ी पुलिस सुरक्षा में पुनर्निर्माण शुरू किया गया था लेकिन सुबह ही काम रुक गया। स्मारक पर पालीथिन ढक दी गई। वह वर्षों नहीं हटी। अब वह भी फट गई है। इस बाबत तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और मौजूदा डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी का कहना है कि उन्हें पूर्व में बताया गया था कि स्मारक का पुनर्निर्माण कराया गया है लेकिन अगर नहीं हुआ है तो वह खुद जाकर देखेंगे। उधर, फतेहगंज थानाध्यक्ष अमर सिंह यादव का कहना था कि वो जब से आए हैं स्मारक ऐसा ही देख रहे हैं। पुनर्निर्माण उच्चाधिकारियों का मामला है।