बांदा। सूखा के बाद अब बाढ़ के सदमे में किसानों की आत्महत्याएं शुरू हो गईं हैं। बाढ़ से पीड़ित किसान की आत्महत्या की पहली घटना शनिवार को हुई। पेड़ पर फांसी में टंगे किसान का शव चार दिन बाद मंगलवार की शाम बरामद हुआ।
सूखा से परेशान होकर बड़ी तादाद में किसानों ने पिछली फसल में आत्महत्याएं की थीं। अनेक किसानों की जान सदमे में हार्टफेल होने से चली गई। अब किसान बाढ़ की बर्बादी नहीं बर्दाश्त कर पा रहे।
तनाव या मायूसी में आत्महत्याएं कर रहे हैं। शहर कोतवाली क्षेत्र के दरदा गांव के जगदीश (45) पुत्र रामेश्वर निषाद शनिवार की केन नदी में आई भीषण बाढ़ से पांच बीघा फसल डूब गई। मकान और गृहस्थी धराशायी हो जाने पर शरण लेने छावनी डेरा आ गया था। शनिवार शाम सड़क किनारे मवेशी बांधने के बाद वह लापता हो गया। तब से उसकी तलाश की जा रही थी।
मंगलवार को शाम चरवाहों ने मटौंध थाना क्षेत्र के मरौली गांव से दो किलोमीटर दूर वन विभाग के जंगल में पेड़ में फांसी पर टंगा शव देखा। जंगली जानवरों ने पैर नोंच डाले थे। फौरी तौर पर शिनाख्त नहीं हो पाई। पुलिस ने पंचनामा कर शव पोस्टमार्टम को भेज दिया।
उधर, बुधवार को मृतक की पत्नी राम कुमारी व भाभी करधनिया ने शव देखकर शिनाख्त की। मृतक के तीन पुत्रियां और एक पुत्र है। पत्नी ने बताया कि तीन साल से कुछ खेत में पैदावार नहीं हुई। अबकी बुआई की तो बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया। बेटी की शादी भी करनी है। इन्हीं सब चिंताओं से तंग आकर जगदीश ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।