बांदा। धान की फसल पर बीपीएच (भूरा फुदका कीट) का असर दिखने लगा है। यह कीट पूरे पौधे को नष्ट कर देता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने कहा कि फसल को लाइट ट्रैप (प्रकाश प्रपंच) के प्रयोग से बचाया जा सकता है।
जिले में धान की फसल अब अंतिम स्टेज पर है। कुछ में बालियां निकल आईं है और प्रौढ़ हो रही हैं। कुछ पकने की स्थिति में पहुंच गई हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो धान की फसल के लिए यह समय काफी नाजुक है। ऐसे में उचित प्रबंधन बेहतर पैदावार दे सकता है।
इस समय भूरा फुदका कीट फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र सिंह ने धान की बेल्ट माने जाने वाले नरैनी, अतर्रा, बिसंडा और बड़ोखर ब्लाकों का दौरा किया। किसानों से बातचीत की। कहा कि फसल पर भूरा फुदका कीट का असर देखा जा रहा है।
इस कीट के हमले से तेजी से फसल को नुकसान पहुंचाता है। फसल धीरे-धीरे खराब हो जाती है। इसका उत्पादन पर भी असर पड़ता है। वैज्ञानिक ने किसानों को देशी वैज्ञानिक विधि से लाइट ट्रैप (प्रकाश प्रपंच) का प्रयोग लाभकारी बताया है। इस बारे में किसानों को जानकारी दी जा रही है। डॉ. मुलायम सिंह परिहार ने बताया कि यह कीट तने के ऊपरी हिस्सों में सैकड़ों की संख्या में लगता है और रस चूसना शुरू कर देता है। तना कमजोर हो जाता है और फसल गिरकर सूख जाती है। उत्पादन 20 फीसदी तक कम होता है।