बांदा। गर्मी की शुरुआत होते ही केन नदी की जलधारा टूटने लगी हैं। जलधारा को टूटने से बचाने के लिए जलनिगम ने कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। ये कर्मचारी नदी के अवरोध हटाकर भूरागढ़ इंटेकवेल तक पानी पहुंचा रहे हैं, जिससे शहरी लोगों को पेयजल की आपूर्ति की जा सके।
बांदा शहर की करीब ढाई लाख आबादी की प्यास बुझाने के लिए केन नदी ही सहारा है। जल संस्थान भूरागढ़ और बांबेश्वर इंटेकवेल के जरिए हर रोज नदी से करीब साढ़े दस लाख लीटर पानी लेकर शहर को आपूर्ति करता है। पानी को भूरागढ़ में फिल्टर प्लांट में साफ कर सीडब्ल्यूआर में इकट्ठा किया जाता है। फिर शहर में आपूर्ति किया जाता है। मौजूदा समय में पूरे शहर में 24 घंटे में सिर्फ एक घंटे या 40 मिनट ही आपूर्ति की जा रही है।
गर्मी के मौसम में यहां हर साल पेयजल आपूर्ति में संकट आता है। इस वर्ष तो मार्च के पहले पखवाड़े से ही केन नदी की जलधारा टूटने लगी है। हालात ये हैं कि पानी न मिलने से दो-दो दिन तक इंटेकवेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इंटेकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए जल संस्थान ने 10 कर्मचारियों को जलधारा की सफाई और सुरक्षा में ड्यटी लगाई है।
दरअसल मौरंग कारोबारी जलधारा से मौरंग निकालने के लिए नदी की जलधारा बांध देते हैं। इसके अलावा नदी के किनारे सब्जी की खेती करने वाले किसान सिंचाई के लिए जलधारा को बांध देते हैं। तीन वर्ष पूर्व सूखे के हालात में यहां जलधारा बचाने के लिए पुलिस का पहरा लगाना पड़ा था। इस बार फिर वही नौबत आ गई है।
अधिकारियों का कहना है कि भूरागढ़ और बांबेश्वर इंटेकवेल के जरिए साढ़े दस एमएलडी (साढ़े दस लाख लीटर) पानी हर रोज उठाया जाता है, लेकिन मौजूदा समय में कभी सात लाख लीटर तो कभी पांच लाख लीटर पानी भी नहीं मिल पा रहा है।
एक्सईएन ने जिला प्रशासन के समक्ष रखा मुद्दा
जल संस्थान के एक्सईएन ने पानी की समस्या के मद्देनजर जलधारा प्रभावित होने का मुद्दा जिला प्रशासन के सामने रखा है। उनका कहना है कि केन नदी में ऊपर से जलधारा प्रभावित की जा रही है। चैनल के जरिए इंटेकवेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जलधारा प्रभावित करने का विरोध करने पर सब्जी की खेती करने वाले किसान और मौरंग का खनन करने जल निगम के कर्मियों से झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। यदि अभी इस पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई तो अप्रैल, मई में पानी का बड़ा संकट और गहरा हो सकता है।
वर्जन...
गर्मी इस वर्ष अभी से जोर पकड़ रही है। इससे केन नदी की जलधारा कमजोर पड़ रही है या टूट रही है। इसके लिए कर्मचारियों को जलधारा की देखरेख के लिए लगाया गया है। जिला प्रशासन के समक्ष भी मामला रखा गया है। -संदीप उपाध्याय, सहायक अभियंता, जल संस्थान, बांदा