बांदा-पारीछा लाइन के धराशायी टावर के पुर्ननिर्माण में जुटे मजदूर।
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बांदा। बुधवार को आई तेज आंधी में बांदा-पारीछा लाइन के धराशायी हुए दो टावरों के पुनर्निर्माण का काम शुरू हो गया है। भीषण धूप में आग की तप रहे लोहे के टावरों पर काम करने में मजदूरों और कर्मचारियाें को पसीने छूट रहे हैं। पावर कारपोरेशन ट्रांसमिशन के अभियंता अपनी निगरानी में टावरों का निर्माण करा रहे हैं।
पारीछा (झांसी) बिजलीघर से चित्रकूटधाम मंडल को 200 मेगावाट बिजली मिल रही है। दो साल पूर्व ही इसकी नई लाइन डाली गई थी। बुधवार को दोपहर आई आंधी के तेज झोंके ने बांदा-महोबा नेशनल हाइवे में गोयरा मुगली गांव के पास इस लाइन के दो टावर (संख्या 66 व 67) धराशायी कर दिए।
इससे पारीछा से मिल रही बिजली ठप हो गई। पावर कारपोरेशन (ट्रांसमिशन) के अधिशासी अभियंता उमेश कुमार वर्मा ने बताया कि टावरों के पुनर्निर्माण का काम तत्काल शुरू कर दिया गया। ट्रांसमिशन के अभियंताओं की देखरेख में मजदूर और कर्मचारी लगा दिए गए हैं। शुक्रवार से इस काम में और तेजी लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि दोनों टावर बनकर तैयार होने में लगभग 15 दिन लगेेंगे। तब तक फतेहपुर से कुछ बिजली लेकर आपूर्ति की जा रही है।