बांदा। पायका योजना में क्रीड़ा सामग्री खरीद पर क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारियों ने जमकर खेल किया। फर्म से गुणवत्ता संबंधी प्रमाणपत्र नहीं लिया और न ही लाखों की धनराशि में टीडीएस काटा गया। लेखा परीक्षक ने आडिट में इस पर आपत्ति जताई है। जिला युवा कल्याण अधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों के जरिये क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारियों से दो दिन में स्पष्टीकरण मांगा है।
गांव-गांव खेल प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से वर्ष 2012 से हर साल पायका योजना के तहत 10-10 ग्राम पंचायतों का चयन किया जा रहा है। यहां खेल गतिविधियां शुरू कराने और प्रशिक्षिक के जरिये ग्रामीण युवा खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों में निपुण बनाने के निर्देश हैं। इसके लिए हर साल लाखों रुपये युवा कल्याण विभाग को बजट जारी किया जा रहा है, लेकिन अधिकारी सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं।
मानकों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से खेल सामग्री खरीदी जा रही है। लेखा परीक्षा विभाग ने पिछले दिनों युवा कल्याण विभाग में आडिट किया। इसमें क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारियों की अनियमितताएं सामने आईं।
पायका योजना के तहत खेल उपकरण और सामग्री तो खरीद ली गई, लेकिन संबंधित फर्म से गुणवत्ता संबंधी प्रमाणपत्र नहीं लिया। पिछले वित्तीय वर्ष में भुगतान की गई लाखों की धनराशि में टीडीएस भी नहीं काटा। अभिलेख पूर्ण नहीं मिले। विधावार खिलाड़ियों की सूची, क्रीड़ाश्री की उपस्थिति पंजिका, ग्रांट रजिस्टर आदि अभिलेख क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारियों ने उपलब्ध नहीं कराए।
पायका सेंटर के लिए एककालिक पूंजीगत अनुदान के तहत आवंटित धनराशि के सापेक्ष खेल सामग्री और उपकरणों के खरीद और मैदान के विकास के लिए 65 और 35 फीसदी खर्च का अनुपात नहीं रखा गया। मैदान के विकास में कम और खेल सामग्री में ज्यादा धन उड़ाया।
समय-समय पर ग्राम पंचायतों में खेल सामग्री और उपकरण का जिला स्तरीय अधिकारियों से सत्यापन कराने की रिपोर्ट आडिट में नहीं उपलब्ध कराई गई। जिला युवा कल्याण अधिकारी राजेंद्र त्रिपाठी ने सभी क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारियों से दो दिन में बिंदुवार सूचनाएं और स्पष्टीकरण देने को कहा है, ताकि आडिट संबंधी आपत्तियों का निस्तारण किया जा सके।