बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते साल के सबसे गर्म दिन की रात को आधे शहर के लोग लाइट गुल होने से बिलबिला उठे। पसीने में तर-बतर बच्चों के रोने की आवाजें हर घर में गूंजती रहीं। वहीं बड़ों ने घर के बाहर टहलकर रात काटी। सुबह पानी के लिए भी हाय-तौबा मच गई। मंगलवार की दोपहर बाद बिजली आने से राहत मिली।
सोमवार को चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में बिजली कर्मचारी संघ के आह्वान पर बिजली कर्मी हड़ताल पर चले गए थे। दिन में बिजली कर्मचारी संघ नेताओं और पावर कारपोरेशन के मुख्य अभियंता व अधीक्षण अभियंता के बीच हुई समझौता वार्ता फेल हो गई।
बिजली कर्मी नेताओं का कहना था कि वार्ता बैठक में प्रशासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी को भी शामिल किया जाए। इस बीच शहर और ग्रामीण क्षेत्र के कई फीडर बंद हो गए। शाम होते ही बिजली संकट गहरा गया। पानी की आपूर्ति भी नहीं हो सकी।
शहर में टेलीफोन एक्सचेंज और भूरागढ़ फीडर बंद हो गए। देर रात अमर टाकीज के पास लगा 630 केवीए का ट्रांसफार्मर फुंक गया। कुछ देर बाद जीजीआईसी के नजदीक लगा 400 केवीए का ट्रांसफार्मर भी फुंक गया। इससे आधे शहर के कई हजार उपभोक्ताओं के घरों में बिजली गुल हो गई। गर्मी से लोग बिलबिला उठे।
देर शाम डीएम आवास से बताया गया कि डीएम सुरेश कुमार ने अधीक्षण अभियंता एके सक्सेना और अधिशासी अभियंता समरजीत को निर्देश दिए हैं कि हड़ताली कर्मचारियों के नेताओं से अभी बात करें और हड़ताल खत्म कराएं। ताकि बिजली चालू हो सके।
डीएम ने यह भी कहा कि अगर जरूरी हो तो प्रशासन के किसी अधिकारी को साथ ले लें, लेकिन दोनों अभियंताओं ने डीएम के इस निर्देश की अनदेखी कर दी। देर रात अधीक्षण अभियंता ने फोन पर मीडिया से बताया कि बिजली कर्मी नेता नहीं मान रहे, जबकि बिजली कर्मियों की अगुवाई कर रहे जोनल मंत्री मोहम्मद सुभान का कहना था कि उनसे किसी अधिकारी ने वार्ता नहीं की।
आधी रात के बाद एसई ने कहा कि लाइट चालू कराएं। सुबह बात होगी। जिसे बिजली कर्मचारी नेताओं ने मानने से इंकार कर दिया। इतना करने के बाद प्रशासन और बिजली विभाग अधिकारी अपने-अपने बंगलों में सो गए। उनके यहां बिजली आ रही थी। दूसरी तरफ शहर का आधा हिस्सा अंधेरे में डूबा रहा।
रात भर लोग सोए नहीं। किसी जनप्रतिनिधि ने भी सुध नहीं ली। सुबह नलों में पानी भी नहीं आया। मंगलवार को दोपहर तक शहर में बिजली का यह भीषण संकट बरकरार रहा।
हड़ताल खत्म होने के बाद शाम को बिजली आपूर्ति चालू हुई। इस बारे में अधीक्षण अभियंता एके सक्सेना का कहना है कि वह लगातार बिजली कर्मचारी नेताओं को हड़ताल खत्म करके बिजली आपूर्ति सामान्य करने के लिए कहते रहे। पर वह नहीं माने।