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बजट की पोटली खाली, 60 फीसदी सड़कें अधूरी

Sat, 14 Mar 2015 11:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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प्रधानमंत्री सड़क निर्माण योजना (पीएमजीएसवाई) की निर्माणाधीन सड़कों का कार्य इस वित्तीय वर्ष में भी नहीं पूरा हो पाएगा।
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सड़कों के उच्चीकरण के लिए इस वित्तीय वर्ष में स्वीकृत 25.19 करोड़ रुपये में सिर्फ एक करोड़ रुपये ही विभाग को मिल सके। लाखों का काम उधार कर चुके ठेकेदारों ने अब हाथ खींच लिए हैं। अधूरे पड़े मार्गों पर पड़ी मिट्टी और बालू से आए दिन हादसे हो रहे हैं।

महुआ ब्लाक में देवरार से अनुथवा रोड (नौहाई) और नरैनी अतर्रा रोड वाया नंदवारा-हड़हा कबौली से कलहरा तक 11 किलोमीटर लंबी सड़क के उच्चीकरण के लिए चार करोड़ 53 लाख 32 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे। इस मार्ग से पांच गांवों के लोगों को सुविधा मिलती, पर इसमें 10 फीसदी भी काम नहीं हो पाया।
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इसी प्रकार महुआ ब्लाक में ही नगनेधी से बहेरी रोड तक 8.7 किलोमीटर लंबी सड़क पर 3.55 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। इस मार्ग के उच्चीकरण से चार गांवों की आबादी को सुविधा मिलती, लेकिन बजट के अभाव में इसमें सिर्फ मिट्टी व जीएसबी कार्य हो सका है। ठेकेदार उधारी में रिटेनिंग वाल बनवा रहे हैं।

बड़ोखर ब्लाक में जौरही से तिंदवारी रोड  9.2 किलोमीटर लंबे मार्ग के लिए 3.32 करोड़ रुपये सेंक्शन हुए थे। इस मार्ग पर चार गांव लाभान्वित होते, लेकिन इसमें भी बजट की कमी आड़े आ गई। करीब 60 फीसदी के बाद कम ठप है।

बड़ोखर ब्लाक में ही झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाइवे से कपसा तक 10 किलोमीटर लंबे मार्ग के उच्चीकरण के लिए तीन करोड़ 69 लाख 78 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे। पैसा न मिलने से छह माह में इसमें मिट्टी व जीएसबी काम पूरा होकर रिटेनिंग वाल तक ही कार्य पहुंचा है। इन मार्गों का कार्य पीएमजीएसवाई यूनिट प्रथम के जिम्मे है।

उधर, यूनिट-2 द्वारा महुआ ब्लाक में अनथुवा से देवरार रोड का उच्चीकरण का कार्य कराया जा रहा है। 12 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की लागत चार करोड़ 39 लाख रुपये है। इसमें अभी तक सिर्फ 25 लाख रुपये ही मिले हैं। इसमें टेंडर की प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है।

3.86 करोड़ 36 हजार की लागत से बन रहे खुरहंड से बांसी 11 किलोमीटर लंबे मार्ग की भी कमोवेश यही हालत है। इसमें 10 गांव जुड़े हैं। इसमें हाल ही में टेंडर हो चुका है। अभी कार्य शुरू नहीं हो सका।

नरैनी में बरछा से सढ़ा रोड छह किलोमीटर मार्ग के लिए एक करोड़ 83 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें भी बजट का इंतजार है। इस मार्ग से पांच गांवों के लोगों का आना जाना है। 

सड़कों का निर्माण बजट के अभाव में पूरा नहीं हो पा रहा है। कई बार केंद्र व प्रदेश सरकार से बजट की मांग की गई है। फिर भी बजट नहीं आया है। ठेकेदार भी कितना उधारी में काम कराएं?

पैसा आते ही तेजी से काम पूरा कराया जाएगा। 10 करोड़ रुपये की लागत से नए मार्गों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बजट आते ही इनका भी कार्य शुरू हो जाएगा। -एनके त्रिपाठी, एक्सईएन, पीएमजीएसवाई, बांदा

गिट्टी व बालू से आए दिन हादसे
बांदा। वित्तीय वर्ष 2013-14 की प्रधानमंत्री सड़क निर्माण योजना की दो दर्जन से ज्यादा सड़कें अर्द्धनिर्मित पड़ी हैं। सड़क में डाली गई गिट्टी व बालू पटरियों पर फैली हुई है। इससे हादसे हो रहे हैं।

जौरही से तिंदवारी मार्ग में साल भर से कछुआ गति से कार्य चल रहा है। सड़क पर पड़े बोल्डर उखड़कर सड़क व पटरियों पर बिखरे हुए हैं। इस रूट में दिन भर टैक्सी, बाइक, कार समेत सैकड़ों वाहन गुजरते हैं।

ऐसे ही खुरहंड से बांसी और नगनेधी से बहेरी मार्ग पर भी अर्धनिर्मित सड़कें हादसों का सबब बनी हुई हैं। टेंपो आए दिन पलटने से यात्री जान से हाथ धोते हैं।

15 दिन में बनेंगी 15 करोड़ की सड़कें
बांदा। पीडब्लूडी में वित्तीय वर्ष के बचे आखिरी पखवारे में सड़कों पर 15 करोड़ रुपये ‘बिछ’ जाएंगे! साल भर या तो बजट का रोना रहा या कोई और अड़ंगों के चलते काम लटका रहा।

अब वित्तीय वर्ष में बजट सरेंडर से बचाने के लिए अधिकारियों ने काम में तेजी दिखाई है। इतने कम समय में सड़क के जिन कामों में करोड़ों रुपये बहाए जाएंगे, उनकी गुणवत्ता कैसी होगी, यह समय बताएगा। 

वित्तीय वर्ष 2014-15 में शासन ने पीडब्ल्यूडी की प्रांतीय खंड, निर्माण खंड और निर्माण खंड-एक इकाई को 147 करोड़ रुपये दिए थे। अब तक यह तीनों यूनिट सिर्फ 132 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी हैं। अब वित्तीय वर्ष खत्म होने में सिर्फ 15 दिन बचे हैं तो अभियंता इन 15 करोड़ को खर्च करने की कवायदों में जुट गए हैं।

ऐसा न हुआ तो 31 मार्च के बाद यह पैसा शासन को वापस लौटाना होगा। इससे शासन की कार्रवाई भी झेलनी पड़ सकती है। होली का अवकाश और सीएम के कार्यक्रम में अधिकारियों का काफी समय जाया हो गया। अब बचे हुए 15 दिनों में शेष बचे कार्यों को पूरा करने की होड़ है।

बांदा-बहराइच स्टेट हाइवे के लिए इस वित्तीय वर्ष में 77 करोड़ रुपये मिले थे। पहली किश्त 33 करोड़ और दूसरी 44 करोड़ की किश्त अक्तूबर में मिली थी। विभाग का दावा है कि 39.400 किलोमीटर का यह इस्टीमेट है। इसमें 21 किलोमीटर सड़क का काम तकरीबन पूरा हो चुका है। 19 किलोमीटर का काम बाकी है।

उधर, बाईपास निर्माण में भी अब साल के आखिरी दिनाें में पीडब्ल्यूडी ने तेजी दिखाई है। मेडिकल कालेज के पीछे केन नदी (दुरेड़ी) से महोबा एनएच तक काम तेजी से किया जा रहा है। इधर, फोरलेन बाईपास पुल (कनवारा) के पास से बबेरू रोड तक बाईपास का काम पूरा हुए छह माह से ऊपर हो गए हैं।

इसके आगे दुरेड़ी से फोरलेन ब्रिज तक काम ठप रहा। अब मार्च आते ही इसमें भी तेजी से काम कराया जा रहा है।  उधर, सड़कों की मरम्मत के लिए वित्तीय वर्ष में आए 47 करोड़ रुपये में अभी तक आधी रकम भी नहीं खर्च हुई। अब आखिरी पखवारे में ज्यादा से ज्यादा मरम्मत कराने की तैयारी है।

मरम्मत के नाम पर भारी गड्ढों में मिट्टी भरने के बाद उस पर बजरी और कोलतार छिड़ककर खानापूरी की जा रही है। उधर पीडब्ल्यूडी, एक्सईएन अखिलेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं हाइवे और बाईपास का काम पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है। 15 करोड़ रुपये बचना कोई बड़ी बात नहीं है।

इस वर्ष तकनीकी अड़ंगे और बजट में देरी से कुछ काम पूरे नहीं हो पाए, लेकिन नए वित्तीय वर्ष में गांवों से लेकर शहरों की सड़कें चमकेंगी।

लोहिया गांवों में 15 दिन में खर्च होंगे 5 करोड़
बांदा। वर्ष 2014-15 में चयनित 28 लोहिया गांवों में भी सड़कों की मरम्मत व निर्माण में पीडब्ल्यूडी ने पूरे साल लापरवाही दिखाई। अब मार्च के बचे खुचे दिनों में इन गांवों की सड़कों को चमकाने की तैयारी है।

पीडब्यूडी के एक अधिकारी ने बताया कि शासन से लोहिया गांवों के लिए इस वित्तीय वर्ष में 8.73 करोड़ रुपये जारी हुए थे। इसमें से करीब पांच करोड़ काम कराया जुका है।

बाकी के बचे पौने चार करोड़ रुपये 15 दिनों में खर्च करने की तैयारी है। बबेरू, कमासिन और नरैनी के आधा दर्जन ऐसे लोहिया गांव हैं, जहां सड़कों पर पूरे साल कोई काम ही नहीं हुआ। प्रशासन की भी इन गांवों में निगाहें नहीं गईं।

धन की कमी नहीं, फिर भी संपर्क मार्ग अधूरे
बांदा। भरपूर बजट के बावजूद त्वरित आर्थिक विकास योजना से निर्माणाधीन लगभग 14 करोड़ रुपये लागत के संपर्क मार्ग अधूरे हैं। इनमें दो ऐसे हैं जिनका निर्माण लगभग दो साल पहले शुरू हुआ था।

त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों पर संपर्क मार्ग व हैंडपंप निर्माण कराया जाना था। वित्तीय वर्ष 2013-14 में संपर्क मार्गों की स्वीकृति के साथ कार्यदाई संस्था प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को इस्टीमेट के मुताबिक धनराशि जारी कर दी गई थी।

बबेरू क्षेत्र में बुढ़ौली-कुरेहा मार्ग से दुबेन का पुरवा होते हुए देवरार संपर्क मार्ग निर्माण के लिए दो करोड़ 51 लाख 86 हजार रुपये अवमुक्त किए गए थे। जून 2013 को काम शुरू होने के बाद अभी तक यह संपर्क मार्ग अधूरा है। कमासिन क्षेत्र में कुम्हेढ़ा-सांड़ा संपर्क मार्ग के लिए भी तीन करोड़ 39 लाख 46 हजार रुपये कार्यदाई संस्था को दिए गए थे।

यह मार्ग भी अभी अधूरा है। दोनों मार्गों के लिए विभाग के पास पर्याप्त धनराशि अवशेष है। अधिशासी अभियंता का कहना है कि 10 फीसदी काम बाकी है। इसे 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा।

उधर, वित्तीय वर्ष 2014-15 में सिौनी-बगेहटा मार्ग के लिए तीन करोड़ 92 लाख 64 हजार रुपये स्वीकृत हुए हैं। एक करोड़ 96 लाख 42 हजार रुपये अवमुक्त होने के बाद यहां अभी काम की शुरुआत हुई है।

उमरहनी-फल्लू का पुरवा व राजाराम का पुरवा-तरायां संपर्क मार्ग निर्माण को तीन करोड़ 51 लाख 31 हजार स्वीकृत कर एक करोड़ 75 लाख 65 हजार रुपये अवमुक्त किए गए हैं। यहां भी काम की रफ्तार बेहद धीमी है।
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बजट के बावजूद नहीं लगे हैंडपंप
वित्तीय वर्ष 2013-14 में त्वरित आर्थिक विकास योजना से दो किश्तों में 300 हैंडपंप स्वीकृत हो गए थे। अब तक सिर्फ 190 लग पाए। पहली किश्त में 100 हैंडपंप स्वीकृत कर 47.50 लाख रुपये जारी किए गए थे। दूसरी किश्त में 200 हैंडपंपों की मंजूरी के साथ 94.90 लाख रुपये अवमुक्त किए गए। बजट के बावजूद अभी तक 110 हैंडपंप नहीं लग पाए।
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