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डायरिया का प्रकोप, अस्पतालों से व्यवस्थाएं नदारद

Wed, 03 Aug 2016 11:10 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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जमीन पर बैठकर इंतजार करते मरीज। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। जिले में डायरिया और मौसमी बीमारियों के जबरदस्त प्रकोप के बावजूद स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना है। पीएचसी और सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक में कोई अतिरिक्त व्यवस्थाएं नहीं की गईं हैं। अधिकारियों के निरीक्षण भी महज औपचारिकता बन गए हैं।
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जिला अस्पताल में डायरिया और बुखार के मरीजों की भरमार है। अतिरिक्त बेड न होने से मरीजों को जमीन पर लिटाया जा रहा है। दवाओं का टोटा है। दवाएं बाजार से मंगाई जा रही हैं। सदर विधायक विवेक सिंह ने इस पर कड़ा रोष जताया है।

पखवारे भर से डायरिया कहर बरपा रहा है। कई सौ लोग इसकी चपेट में हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में 700-800 मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा करीब सौ मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं लेकिन अस्पताल में न तो अतिरिक्त बेड की व्यवस्था है न डाक्टर या दवाओं की।
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ट्रॉमा सेंटर में भी इलाज का ड्रामा चल रहा है। स्टोर की दवाएं तेजी से खत्म हो रही हैं। डीएनएस, आरएस और डेस्टरोल बोतलों का स्टाक खत्म होने को है। लगभग चार सौ बोतल रोज लग रही हैं। ड्रिप सेट भी गिनी-चुनी हैं।

बोतल या इंजेक्शन लगाने के लिए अस्पताल में बीगो भी नहीं है। मरीजों को ये बाजार से लाने पड़ रहे हैं। औषधि भंडार के चीफ फार्मेसिस्ट वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मरीजों की तादाद यूं ही रही तो स्टोर का स्टाक चंद दिनों में खत्म हो जाएगा। बताया कि सीएमओ को अवगत कराकर मांग पत्र भेजा गया है।

डायरिया मरीजों के लिए खोला नेत्र वार्ड
बांदा। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. किशोरी लाल का कहना है कि मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर नेत्र विभाग के वार्ड दो को डायरिया पीड़ितों के लिए खोल दिया गया है। यहां 15 बेड हैं। इसके अलावा पुराने इमरजेंसी कक्ष को भी खुलवा कर बेड डलवाए जा रहे हैं। 20 नए बेडों की भी व्यवस्था की जा रही है।

हृदय रोग विशेषज्ञ कर रहे डायरिया का इलाज
बांदा। एक तरफ जहां जिला अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ है, वहीं दूसरी तरफ डाक्टरों का जबर्दस्त टोटा है। अस्पताल प्रशासन दूसरे रोग के विशेषज्ञों से मरीजों का इलाज करवा रहा है। हालात यह हैं कि फिजीशियन डॉ. एसडी त्रिपाठी छुट्टी पर हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. केएल पांडेय डायरिया और बुखार के मरीज देख रहे हैं।

हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. टीआर सरसैय्या और राजेश कुमार वर्मा कई दिनों से छुट्टी पर हैं। उनके मरीज सर्जन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव निपटा रहे हैं। एक अन्य सर्जन डॉ. योगेंद्र भी तीन दिन से छुट्टी पर हैं। इस बारे में सीएमएस का कहना है कि जो डाक्टर उपलब्ध हैं, उन्हीं से काम लिया जा रहा है। यह भी कहते हैं कि एमबीबीएस डाक्टर हर मर्ज का इलाज कर सकता है। डाक्टरों की स्थायी व्यवस्था के लिए वे अपर निदेशक से बात करेंगे।
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