बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में हर साल 2 अरब से ज्यादा का राजस्व जुटाने वाले उप निबंधन कार्यालयों में अफसरों की ज्यादातर कुर्सियां खाली हैं। रोजाना लाखों रुपये के निबंधन कार्य लिपिक निपटा रहे हैं। तीन कार्यालयों को छोड़कर शेष 10 की यही स्थिति है। हैरत की बात यह है कि यह पद करीब सात साल से खाली हैं। रजिस्ट्रार पदों पर पिछले डेढ़ दशक से नियुक्तियां नहीं हुईं।
मंडल के चारों जनपदों में कुल 13 उप निबंधन (सब रजिस्ट्रार) कार्यालय हैं। इनमें बांदा, महोबा और कर्वी सदर को छोड़कर अन्य सभी कार्यालयों में रजिस्ट्रार के पद खाली हैं। उनका काम कार्यालय के लिपिक अंजाम दे रहे हैं। जबकि यह काम रजिस्ट्रार का है जो उत्तर प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग से चयनित होते हैं।
बांदा में अतर्रा, नरैनी व बबेरू, चित्रकूट में मऊ और महोबा में कुलपहाड़, चरखारी व राठ तथा हमीरपुर में सदर सहित सरीला व मौदहा में उप निबंधन कार्यालयों में कई वर्षों से रजिस्ट्रार नहीं हैं। इन कार्यालयों में नियुक्त इकलौते
लिपिक रजिस्ट्रार का काम अंजाम दे रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक मंडल के चारों जनपदों में औसतन हर महीने लगभग 3 अरब की संपत्ति के 400 बैनामे होते हैं। इनमें रजिस्ट्री व स्टांप शुल्क के रूप में प्रति माह 17 से 18 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त होता है। रजिस्ट्रार और स्टाफ की कमी से बैनामा, इकरारनामा, शादी पंजीयन आदि काम प्रभावित हो रहे हैं।
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चार्ट-
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मंडल में निबंधन कार्यालयों में औसतन होने वाले बैनामे और राजस्व (करोड़ में)
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जनपद बैनामा संपत्ति राजस्व
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बांदा 150 90 5.40
हमीरपुर 100 80 4.80
महोबा 90 70 4.20
चित्रकूट 60 50 3.00
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योग- 400 2.90 17.40
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चित्रकूटधाम मंडल के डीआईजी (स्टांप) पीके द्विवेदी 28 अगस्त को प्रमोशन पर बहराइच से यहां आए थे। 31 अगस्त को सेवानिवृत हो गए। इसके अलावा सहायक महानिरीक्षक (निबंधन) के स्टेनो संतूलाल यादव, बबेरू के प्रभारी रजिस्ट्रार अशोक कुमार, महोबा के निबंधन लिपिक विजय पाल भी 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गए हैं।
उप निबंधन कार्यालयों में स्टाफ की कमी की आड़ में उप निबंधकों ने प्राइवेट लोगों को अपने स्तर से लगा रखा है। बैनामों में वसूले जाने वाले दो फीसदी सुविधा शुल्क से इनका भुगतान किया जाता है।
खनन व आबकारी के बाद निबंधन विभाग प्रदेश सरकार का सबसे बड़ा राजस्व का स्रोत है। उधर, अब खनिज पट्टों की डीड में स्टांप लगने से निबंधन के राजस्व में भारी इजाफा हुआ है। कोरोना संक्रमण काल में भी इस वर्ष विभाग को सर्वाधिक राजस्व बालू खदानों के पट्टों से मिला है।
मंडल के डीआईजी, एआईजी कार्यालय सहित उप निबंधन कार्यालयों में लिपिकों का भी टोटा है। करीब दो सैकड़ा पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष मात्र 14 लिपिक और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही नियुक्त हैं। एआईजी ने बताया कि शासन संविदा पर भी कर्मचारी रखने की अनुमति नहीं दे रहा है।
डीआईजी (स्टांप) का दफ्तर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे है। 31 अगस्त को डीआईजी के सेवानिवृत्त होने के बाद सिर्फ एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही बचा है। कमोवेश यही स्थिति एआईजी (स्टांप) कार्यालय की भी है। यहां मात्र एआईजी ही हैं। स्टाफ शून्य है।
स्टाफ की कमी से शासन को प्रत्येक माह अवगत कराया जाता है। उप निबंधक की नियुक्ति आयोग से की जाती है। पिछले डेढ़ दशक से कोई भी नियुक्ति नहीं हुई है। आलम यह है कि 70 फीसदी उप निबंधन कार्यालयों में सिर्फ एक या दो स्टाफ है। - अखिलेश कुमार, प्रभारी डीआईजी (स्टांप), चित्रकूटधाम मंडल, बांदा