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जैविक सब्जी उगा फलफूल रहीं फूला

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बांदा। कैंसर से जंग लड़ रहीं समाजसेवी फूलादेवी का खेत सब्जी से फलफूल उठा है। इसमें फूला की गाढ़ी मेहनत शामिल है। यहां पैदा हो रही सब्जी की विशेषता यह है कि यह पूरी तरह जैविक/आवर्तनशील खेती पर आधारित है। इसमें रासायनिक खाद का नामोनिशान नहीं है। पालतू मवेशियों की 10 ट्राली गोबर से बनाई खाद खेत में डाली गई है।
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मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित बड़ोखर खुर्द गांव की फूला देवी कई साल से कैंसर से पीड़ित हैं। उनका इलाज मुंबई से चल रहा है। उम्र भी 60 बरस के ऊपर है, लेकिन जज्बे में कोई कमी नहीं। कुछ साल पूर्व गांव में सहायता समूह गठित किया।
महिलाओं और युवतियों को साथ जोड़कर गांव में युवाओं और पुरुषों में तेजी से पनपी शराब और जुएं की लत के खिलाफ आवाज उठाई। दुकानों में धावे बोलकर गांव में बिक रही शराब रुकवा दी। घरों में रखी शराब उठाकर नालियों में बहा दी। इसे लेकर फूला काफी सुर्खियों में रहीं।
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अब फूला देवी का पूरा ध्यान अपने ही खेत में बिना रसायनिक खाद के सब्जी उगाने पर है। फूला बताती हैं कि दो बीघा में लौकी-तरोई, कद्दू, खीरा, भिंडी और तीन बीघा में मूंग बोई है। 10 ट्रॉली गोबर और बकरी की मेंगनी की खाद डाली। अपने साथ दो परिवारों को भी इसमें शामिल किया।
अब रोजाना हरेभरे खेत से काफी मात्रा में सब्जी निकल रही है। फूला सिंह सहित दोनों परिवारों का गुजारा हो रहा है। खास बात यह है कि बिना खाद वाली इस सब्जी के खरीददार खेत में खुद आ रहे हैं। फूला अपनी सब्जी बाजार में नहीं ले जाती। फूला ने बताया कि गांव के 10 अन्य किसानों को भी गोबर की खाद देकर जैविक खेती के लिए प्रेरित किया है।
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