बांदा। स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर प्रधानाचार्यों, अभिभावकों और शिक्षकों का अलग-अलग नजरिया है। कुछ इसे अच्छा मान रहे हैं तो कुछ ने इसे बच्चों में तनाव बढ़ाने की दलील देकर खारिज कर दिया। स्कूली बच्चों के शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से गाइड लाइन जारी की है।
लॉकडाउन के चलते स्कूल-कालेजों में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की गई थीं। लॉकडाउन खत्म होने और अनलॉक चालू होने के बाद भी यह जारी हैं। स्कूल प्रबंधन ने अपने मनमाफिक ऑनलाइन कक्षाओं का समय तय कर रखा था। न अवधि निर्धारित थी, न समय।
इसे लेकर छात्र और अभिभावक दोनों ही परेशान और असहमत थे। इसका संज्ञान लेते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। अब प्री-प्राइमरी से 8वीं तक के बच्चों को 30 मिनट, कक्षा 9 से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को अधिकतम 45 मिनट ही ऑनलाइन शिक्षा दी जा सकेगी। हाल ही में आए यह दिशा-निर्देश लागू हो गए हैं।
ग्रामीण परिवेश में अव्यावहारिक
ऑनलाइन कक्षाएं ग्रामीण परिवेश में अव्यावहारिक हैं। शहरी क्षेत्रों में भी बच्चे और अभिभावक इससे सहमत नहीं हैं। बच्चों पर तनाव और दबाव बढ़ा है। देर तक मोबाइल फोन की स्क्रीनिंग देखने से बच्चों की आंखों और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता था।-आशुतोष त्रिपाठी, अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ।
ऑनलाइन पढ़ाई नहीं होनी चाहिए
ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की बौद्धिक क्षमता पर असर पड़ रहा है। यह बच्चों के स्वास्थ्य हित में नहीं है। ज्यादा देर तक मोबाइल की स्क्रीन पर देखने से वे कुंठाग्रस्त और बीमार हो सकते हैं। सभी बच्चों के पास स्मार्टफोन भी उपलब्ध नहीं हैं।-संजय तिवारी प्रधानाचार्य, राजादेवी इंटर कॉलेज, नरैनी रोड।
समय निर्धारण का फैसला सही नहीं
ऑनलाइन पढ़ाई में समय निर्धारण का फैसला सही नहीं है। 45 मिनट में बच्चों को संपूर्ण शिक्षा नहीं दी जा सकती। 45-45 मिनट की दो कक्षाएं चलनी चाहिए। बुंदेलखंड में सभी छात्र-छात्राओं के पास एंड्रायड फोन और लैपटॉप नहीं हैं।-अमिता सिंह, प्रधानाचार्य, सरस्वती बालिका इंटर कॉलेज, बांदा।
समय निर्धारण का फैसला सही
कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल बंद होने से ऑनलाइन कक्षाओं का निर्णय विकल्प के रूप में लिया गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने समय निर्धारित कर सही फैसला लिया है। इससे बच्चों पर दबाव भी कम होगा। पढ़ाई भी बाधित नहीं होगी।-सुनील सिंह, अध्यापक, राजादेवी इंटर कॉलेज, बांदा।
मंत्रालय ने उठाया सार्थक कदम
मेरा बेटा अंशुमान सिंह 10वीं का छात्र है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा उठाया गया यह बहुत ही सार्थक है। स्कूल बंद होने के कारण बच्चे दिन भर मोबाइल पर खेलते रहते थे। यह गाइडलाइन आने के बाद अब वह निर्धारित समय में अपने पाठ्यक्रम को पूरा कर सकेंगे।-प्रीति सिंह, नोनिया मुहाल।
बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं में ले रहे रुचि
बच्चों की पढ़ाई लॉकडाउन की वजह से लंबे समय से बाधित थी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की इस गाइडलाइन से बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं में रुचि ले रहे हैं। कक्षाएं स्कूलों के द्वारा व्यवस्थित ढंग से चलाई जा रही हैं। इससे बच्चों को काफी हद तक सहूलियत मिलेगी।-सरोज निषाद, छाबी तालाब।