सावन मास के पहले सोमवार को शिवालय हर-हर महादेव से गूंज उठे। तड़के से श्रद्धालुओं में जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक की होड़ रही। कई जगह शिवभक्तों ने भंडारा किया। उधर, ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग स्थित नीलकंठेश्वर शिव मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा।
बांबेश्वर पर्वत में स्थित शिव मंदिर में तड़के से भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। 8 मीटर संकरी गहरी गुफा के अंदर शिवलिंग के जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक की होड़ रही। दही, शहद व केवड़ा से भी अभिषेक हुआ। बेलपत्र व फूल चढ़ाकर चंदन का लेप लगाया।
इस दौरान मंदिर महादेव के जयकारों से गूंजता और फूलों व अगरबत्ती से महकता रहा। इसी तरह कटरा स्थित शिव मंदिर, महेश्वरी देवी, संकट मोचन व काली देवी मंदिर में स्थापित शिव मूर्ति की पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ रही। कैलाशपुरी पर्वत में कई शिवभक्तों ने भंडारा किया। बेटा महाराज की निगरानी में नीरज तिवारी, पुत्तन तिवारी आदि ने व्यवस्था संभाली।
उधर, ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग में स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर में भक्तों का रेला उमड़ा। दूर तक श्रद्धालुओं की लाइन लगी रही। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। खप्टिहा कलां में कालेश्वर मंदिर में भी यही हाल रहा। बबेरू प्रतिनिधि के मुताबिक मढ़ी दाई मंदिर आदि में श्रद्धालुओं ने रुद्राभिषेक किया। अतर्रा के गौराबाबा धाम में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। रात में कीर्तन व आरती हुई।