बांदा। स्वास्थ्य विभाग में सीएमओ से लेकर एडिशनल सीएमओ, डिप्टी सीएमओ, एसआईसी, सीएमएस सहित कई पद डॉक्टर संभालते हैं। इन्हें पद संभालने के साथ ही ओपीडी में सेवा देने के आदेश हैं। सप्ताह में तीन दिन दो-दो घंटे ओपीडी में मरीज देखनें हैं लेकिन छह माह से किसी भी अधिकारी ने ओपीडी में बैठकर मरीजों को नहीं देखा है।
जिला पुरुष अस्पताल में डॉक्टरों के 34 पद स्वीकृत हैं। इनमें महज 13 की तैनाती है। इसी तरह जिला महिला अस्पताल में आठ पदों में सात डाॅक्टरों की तैनाती है। दोनों अस्पताल में रोजाना 1500 से 2000 मरीज ओपीडी में इलाज कराने आते हैं। डॉक्टरों की कमी से मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पाता है। ऐसे में अगर जिला स्तरीय चिकित्साधिकारी मरीजों को देखें तो इनको इसका लाभ मिले। हालांकि जिम्मेदार आदेश के पालन के लिए बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।
फोटो- 40 डॉ. विजेंद्र सिंह । संवाद
विभाग द्वारा ओपीडी में मरीजों को देखने के लिए आदेश जारी हुआ था। तीन माह पहले कार्यभार संभाला है। व्यस्तता के चलते एक भी दिन ओपीडी में मरीजों को नहीं देख सके हैं। समय निकालकर मरीजों को देखने के प्रयास करेंगे।- डॉ. विजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी बांदा
फोटो- 39 डॉ. रेखा रानी। संवाद
शासन का निर्देश है कि ओपीडी में मरीज देखें। विभाग के विभिन्न प्रोग्राम संचालित हो रहे हैं। काम अधिक होने के कारण ओपीडी में मरीजों को नहीं देख पा रही हूं। मौजूदा में संचारी रोग अभियान, बायोमेडिकल वेस्ट के कंपनी चयन की प्रक्रिया चल रही है। -डॉ. रेखा रानी, अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य।
इन्हें ओपीडी में देखना चाहिए मरीज
- डॉ. रेखा रानी, अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
- विजेंद्र सिंह, सीएमओ
- डॉ. किशुन कुमार सीएमएस
- डॉ. अजय कुमार , एसीएमओ
- डॉ. आरएन प्रसाद, एसीएमओ
- डॉ. प्रेम कुमार , एसीएमओ