खटारा मशीनों वाला भूरागढ़ सब स्टेशन कड़ाके की ठंड
में एक बार फिर जवाब दे गया। रोग वही पुराना ओसीबी (आयल सर्किट ब्रेकर)
फुंकने का था। सुबह गुल हुई बिजली शाम तक बहाल नहीं हुई।
कड़ाके की
ठंड में शहर के एक दर्जन से अधिक मोहल्लों के 10 हजार से ज्यादा उपभोक्ता
परेशान रहे। कोई बड़ा अभियंता सब स्टेशन नहीं पहुंचा। कर्मचारी ही मरम्मत
में जुटे रहे।
मंडल मुख्यालय में सबसे ज्यादा लापरवाही का शिकार
भूरागढ़ फीडर है। शहर से दूर होने पर अधिकारी भी यहां झांकने नहीं आते। अवर
अभियंता भी अफसरों की इस ढिलाई का फायदा उठाकर मौज-मस्ती में रहते हैं।
एसएसओ के भरोसे सब स्टेशन है, इसीलिए आए दिन फाल्ट रहता है।
रविवार
को सुबह करीब 7:40 बजे इस फीडर की इनकमिंग ओसीबी फुंक गई। ठीक जलापूर्ति
के समय रहुनिया, खुटला, मर्दन नाका, मढ़िया नाका, खिन्नी नाका, फूटा कुआं,
निम्नीपार, छिपटहरी, कलामतपुरा आदि मोहल्लों की बिजली गुल हो गई। कुओं में
लगे पंप न चलने से नलों में पानी भी नहीं आया। गलन भरी ठंड में उपभोक्ताओं
को परेशानी हुई।
सब स्टेशन के एसएसओ (आपरेटर) महेश्वरी प्रसाद
तिवारी का कहना था कि सुबह शटडाउन लिया गया था। फाल्ट दुरुस्त होने के बाद
शटडाउन वापस हुआ तो चालू करते ही धमाके के साथ ओसीबी में आग लग गई। आपूर्ति
ठप होने के घंटों बाद भी जेई या एसडीओ अथवा अन्य अभियंता सब स्टेशन नहीं
पहुंचे।
कर्मचारियों को ही भेज दिया गया। कर्मी दिन भर मरम्मत में जुटे रहे। सारा दिन इन इलाकों की बिजली गुल रही। पानी का भी संकट हुआ।
भूरागढ़
फीडर के प्रति पावर कारपोरेशन अभियंताओं की लापरवाही का इसी से अंदाजा
लगाया जा सकता है कि इस फीडर के लिए आई नई ओसीबी कई साल से सब स्टेशन परिसर
में रखी धूल खा रही है।
इसे लगाया नहीं जा रहा। खटारा ओसीबी आए
दिन फुंकने से शहर के हजारों उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं। पावर कारपोरेशन
को भी इससे भारी चपत लग रही है। बिजली गुल रहने से राजस्व को भी नुकसान
होता है। बताया गया कि लगभग दो लाख रुपये का नुकसान हुआ है।