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Banda News: अब मिनटों में पकड़ा जाएगा मौरंग खदानों से अवैध परिवहन

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फोटो- 15 खदान में खड़े वाहन में लगाते वीटीएस। स्रोत- विभाग
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- जिले के 1000 वाहनों में लगा व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम, अवैध परिवहन पर 25 हजार जुर्माना
-पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के सिर्फ दो जिले बांदा व हमीरपुर में लगाए जा रहे वीटीएस
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। मौरंग खदानाें से अवैध परिवहन खनिज विभाग के अधिकारी अब तत्कला पकड़ लेंगे। मौरंग परिवहन में लगे वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) लगाया जा रहा है। जिले में अब तक 1000 वाहनों में वीटीएस लगाया जा चुका है। कुल 1200 वाहनों में वीटीएस लगने हैं।
खदान से निकलने पर कितने दिन मौरंग लदा वाहन जाम में फंसा रहा या किस खदान से मौरंग लोड की गई थी, इसका विवरण अब मिनटों में पता चल जाएगा। यह सिस्टम संबंधित क्षेत्र के खनिज विभाग के अधिकारियों के मोबाइल से कनेक्ट रहेगा। वाहनों के परिवहन के समय मोबाइल पर सिस्टम अपडेट होता रहेगा। दिन के किसी भी समय अगर कोई वाहन अवैध परिवहन करते पाया गया तो उसकी खैर नहीं होगी। पकड़े जाने पर सीधे 25 हजार का जुर्माना लगेगा। यह सिस्टम प्रथम चरण में बांदा और हमीरपुर जिले में शुरू किया गया है।
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शासन के पायलट प्रोजेक्ट के तहत बांदा और हमीरपुर में मौरंग खदानों में परिवहन में लगे वाहनों पर वीटीएस लगाया जा रहा है। बांदा में यह काम लगभग शत प्रतिशत की ओर है। हमीरपुर जिले की प्रगति थोड़ी धीमी है। हमीरपुर में तकरीबन 400 वाहनों में वीटीएस लगाया जा चुका है। बांदा जिले में मौरंग के अवैध परिवहन को रोकने के लिए खनिज विभाग की ओर से सीसीटीवी से लैस तीन चेक गेट भी बनाए गए हैं।
इनमें दो नरैनी क्षेत्र और एक मटौंध थाना क्षेत्र में लगा है। इससे मौरंग का परिवहन करने वाले वाहनों का रिकार्ड मौजूद रहता है। वाहनों में वीटीएस लगने से परिवहन करने वाले वाहन जहां-जहां मूव करेंगे इसका रिकार्ड खनिज विभाग के पोर्टल पर शो करेगा। इससे अधिकारी परिवहन करने वाले वाहनों का सच और झूठ का पता लगा लेंगे। साथ ही रायल्टी की भी सच्चाई भी पता चलेगी।
जिले में संचालित 16 खदानें
जिले में वर्तमान में सांड़ी, अमलोर खादर, मरौली-5, इटवां, सादी मदनपुर, सिंधनकला, तेरा , भदावल व मरका-4, पड़ोहरा, हटेटीपुरवा समेत 16 खदानें संचालित हैं। लगभग 1200 वाहनों से मौरंग का परिवहन होता है।
वर्जन
वीटीएस का प्रैक्टिकल कराया जा चुका है। यह सही तरीके से काम कर रहा है। शुरूआत में प्रदेश के सिर्फ दो जिले बांदा और हमीरपुर में यह सिस्टम लगाया जा रहा है। अब तक वीटीएस लगे एक भी वाहन में जुर्माना नहीं हुआ है। बिना वीटीएस लगे वाहनों को परिवहन करने की अनुमति भी नहीं दी जा रही है। इससे सभी वाहनों में वीटीएस लगने का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब अगर अवैध परिवहन करते पाए गए तो सीधे 25 हजार का जुर्माना लगेगा।-राज रंजन, जिला खनिज अधिकारी, बांदा।

क्या है व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम



वाहन ट्रैकिंग सिस्टम एक ऐसी तकनीक है जो जीपीएस का इस्तेमाल करके किसी वाहन की लोकेशन, उसकी गतिविधियों और ड्राइविंग व्यवहार को रियल-टाइम में ट्रैक करती है और मॉनिटर करती है। यह एक जीपीएस ट्रैकर डिवाइस को वाहन में लगाकर काम करता है। जीपीएस और मोबाइल नेटवर्क (3जी/4जी) का उपयोग करके वाहनों के स्थान और गतिविधियों को ट्रैक करता है, और यह डेटा केंद्रीय सिस्टम को भेजता है।
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कार्य:
वाहनों की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक करना और रिकॉर्ड करना
ईंधन की खपत, मार्ग और चालक के व्यवहार की निगरानी करना
बेड़े प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाना
उपयोग: खनिज परिवहन (मिनरल ट्रांसपोर्टेशन) और सामान्य प्रबंधन में.
जीपीएस और वीटीएस में क्या है अंतर
जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) एक तकनीक है जो उपग्रहों का उपयोग करके किसी चीज़ की सटीक लोकेशन बताती है, जबकि बीटीएस (व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम) एक व्यापक सिस्टम है जो वाहन में जीपीएस डिवाइस लगाकर, इंटरनेट के माध्यम से उसकी लोकेशन, स्पीड, ड्राइविंग व्यवहार और अन्य डाटा को एक सेंट्रल सर्वर पर भेजता है, ताकि वाहन की निगरानी और प्रबंधन किया जा सके। जीपीएस सिर्फ़ लोकेशन बताता है, जबकि बीटीएस एक पूरा मैनेजमेंट टूल है जो जीपीएस डाटा और अन्य जानकारी का उपयोग करता है।
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