= हमीरपुर के ध्यानार्थ ==
- बिसंडा में पकड़ी गई 30 हजार शीशियों की खेप ओम मेडिकल एजेंसी के नाम आई थी
- ड्रग एक्ट के उल्लंघन पर डीएलए ने मांगा जवाब, जवाब न देने पर कोर्ट में मुकदमा होगा
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। बिसंडा थाना क्षेत्र में तीन सितंबर को पकड़ी गई 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप की खेप के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। अब ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी (डीएलए) चित्रकूटधाम मंडल ने हमीरपुर के टेढ़ा स्थित ओम मेडिकल एजेंसी के संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसी मेडिकल एजेंसी के नाम पर कोडीनयुक्त सिरप की खेप बांदा आई थी।
एसटीएफ प्रयागराज और बिसंडा पुलिस ने तीन सितंबर को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर कार्रवाई करते हुए ट्रक से 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप बरामद की थी। जांच में सामने आया था कि खेप ओम मेडिकल एजेंसी, टेढ़ा, हमीरपुर के नाम पर आई थी। एजेंसी का संचालन मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन के जीजा रविंद्र गुप्ता के नाम से बताया जा रहा है। मामले की जांच के दौरान एसटीएफ ने रविंद्र गुप्ता को भी हिरासत में लिया है।
ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने बताया कि ओम मेडिकल एजेंसी को ड्रग एक्ट के उल्लंघन के संबंध में नोटिस जारी किया गया है। एजेंसी से पूरे मामले में जवाब मांगा गया है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत जवाब नहीं मिलने पर संचालक के विरुद्ध न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के तहत रखी जा रही है, ताकि आगे चलकर मेडिकल स्टोर संचालक प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का हवाला देकर कार्रवाई से बचने की कोशिश न कर सकें।
खेप के स्रोत और नेटवर्क की जांच
30 हजार शीशियों की इतनी बड़ी खेप ओम मेडिकल एजेंसी के नाम पर आने को लेकर भी जांच की जा रही है। एसटीएफ और पुलिस पहले ही मामले में मुख्य आरोपी समेत अन्य लोगों से पूछताछ कर चुकी है। अब हमीरपुर स्थित मेडिकल एजेंसी के दस्तावेजों और सिरप की खरीद-फरोख्त से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच होगी। इससे कोडीनयुक्त सिरप की खेप के स्रोत और इसके आगे के नेटवर्क की कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है।
पुलिस खंगाल रही आरोपियों के बैंक खाते, जुटा रही सीसीटीवी फुटेज
- लेनदेन से कोडीनयुक्त सिरप के नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश
- सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों के संपर्क में रहे लोगों की तलाश, बिक्री के सुराग मिलने की उम्मीद
अतर्रा (बांदा) । 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप की खेप पकड़े जाने के मामले में आरोपियों केबैंक खाते और बैंक से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस लेनदेन के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कोडीनयुक्त सिरप के नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हैं और इसमें कौन-कौन लोग जुड़े हैं।
पुलिस ने अतर्रा स्थित एचडीएफसी बैंक में आरोपी प्रवीण उर्फ लकी के खाते से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई है। बैंक के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। फुटेज में आरोपी के साथ एक अन्य युवक भी नजर आया है। पुलिस उसकी पहचान और मामले में उसकी भूमिका की जांच कर रही है। जांच एजेंसी बैंक खातों में हुए लेनदेन का मिलान अन्य संदिग्ध गतिविधियों और मामले से जुड़े लोगों से कर रही है। इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी के खाते में किन लोगों से रकम आई और किन लोगों को भुगतान किया गया। पुलिस को उम्मीद है कि वित्तीय लेनदेन से कोडीनयुक्त सिरप की खरीद-बिक्री से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं।
वहीं, सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपी के मेल-मिलाप वाले लोगों की भी पहचान की जा रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि आरोपी बैंक में किन लोगों के साथ पहुंचा था और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। जांच में सामने आने वाले लोगों से पूछताछ के बाद नेटवर्क की अन्य कड़ियां खुलने की उम्मीद है।
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क्रिकेट से कोडीनयुक्त सिरप तक चर्चा में आया लकी
प्रवीण गुप्ता उर्फ लकी की गिरफ्तारी के बाद उसके पुराने गतिविधियों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। बताया जाता है कि उसका जुड़ाव खेल से रहा है और वह क्रिकेट व बास्केटबाल से जुड़ा रहा। करीब डेढ़ वर्ष पहले आईपीएल के दौरान सट्टेबाजी को लेकर भी उसका नाम चर्चा में आया था। अब 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप की खेप के मामले में गिरफ्तारी के बाद उसके पुराने संपर्क और गतिविधियां भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस यदि पूर्व की गतिविधियों और मौजूदा मामले के बीच कड़ियां जोड़ती है तो नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नए तथ्यों के सामने आने की संभावना है।
इनसेट :
कहां तक पहुंचती थी सिरप की खेप, जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि कोडीनयुक्त सिरप की खेप कहां से आती थी और आगे किन स्थानों तक पहुंचाई जाती थी। आरोपी के संपर्क में रहे लोगों और संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल के साथ बिक्री से जुड़े सुराग जुटाए जा रहे हैं। जांच में सामने आने वाले बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ से कथित नेटवर्क के अन्य सहयोगियों तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।