सेनेटरी की दुकान में डेबिट कार्ड से खरीदारी करते ग्राहक सौरभ।
- फोटो : amarujala
सूखे के बाद बाढ़ की मार झेलने वाले बुंदेलखंड ने नोटबंदी में खुद को बदल लिया है। यहां इन दिनों ‘ई-मनी’ से सिस्टम चल पड़ा है। नोटबंदी के बाद हालात इतनी तेजी से बदले की फुटपाथ पर अंडा बेंचने वालो से लेकर पेट्रोल पंप की दुकानों तक में लेनदेन ई मनी से शुरू हो गया है। कहीं स्वाइप मशीन तो कहीं पेटीएम का सहारा लिया जा रहा है।
मुख्यालय बांदा में चिल्ला रोड स्थित पेट्रोल पंप में हाल ही में स्वाइप मशीन से लेनदेन शुरू हुआ है। पेट्रोल पंप मैनेजर जगत तिवारी बताते हैं कि बैंक आफ बड़ौदा की स्थानीय ब्रांच ने यह मशीन उपलब्ध कराई है। फिलहाल इसके कार्ड धारकों की संख्या कम हैं, फिर भी रोजाना लगभग 30 ग्राहक स्वाइप मशीन से ही ईंधन खरीद रहे हैं। बैंकों में कैश संकट से जूझ रहे किसानों ने भी इसे अपनाना शुरू कर दिया है। नादंनमऊ गांव के किसान सुनील ने डेबिट कार्ड बनवा रखा है। उसने एक हजार रुपये का डीजल इसी कार्ड के जरिए अपने ट्रैक्टर पर डलवाया।
सर्वोदय नगर में सेनेटरी और पेंट का कारोबार भी डेबिट कार्ड और स्वाइप मशीन से चल पड़ा है। कलर बैंक प्रोप्राइटर सुनील वाजपेई ने बताया कि उन्हें यह मशीन एचडीएफसी बैंक से मिली है। बताया कि नोटबंदी के बाद इसे लेना मजबूरी था। कई ग्राहक डेबिट कार्डधारक हैं। उन्होंने बताया कि इस सुविधा के लिए वह कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं ले रहे। इस संवाददाता के सामने ही इंदिरा नगर निवासी सौरभ ने नल की टोटी आदि खरीदकर 760 रुपये का भुगतान डेबिट कार्ड से किया।
ई-मनी का चलन सिर्फ बड़े दुकानदारों तक ही नहीं बल्कि फुटपाथों पर दुकान रख कर रोजमर्रा खाने-कमाने वाले दुकानदारों ने भी इसे अपना लिया है। छोटी बाजार में रोजाना शाम को चार पहिया की ठिलिया पर अंडे बेंचने वाले प्रकाश यादव ने भी नोटबंदी के बाद ई-वालेट कंपनी के जरिए पेटीएम हासिल कर लिया है। वह अब अपने अंडे की ठिलिया में ग्राहकों को यह सुविधा उपलब्ध कराए है। हालांकि फिलहाल इस सुविधा का लाभ उठाने वाले ग्राहक कम हैं। लेकिन दिन ब दिन इनकी संख्या बढ़ रही है। उसकी बिक्री बढ़ रही है। वह बताते हैं कि दिनभर में 10 से 12 लोग पेटीएम से भुगतान करने वाले आ रहे हैं।
स्वाइप मशीन लगी तो संभला कारोबार
न्यू मार्केट में मोबाइल टेलीफोन और इलेक्ट्रानिक की दुकान किए सुनील कुमार गुप्ता नोटबंदी के बाद बिक्री में आई मंदी का सामना स्वाइप मशीन से कर रहे हैं। बताया कि नोटबंदी के फौरन बाद बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई। हजारों रुपये का कारोबार घटकर सैकड़ों में आ गया। स्वाइप मशीन लगाने के बाद पुन: कारोबार पुराने ढर्रे पर आ गया है।