राजकीय ऐलोपैथिक मेडिकल कालेज भले शुरू हो गया है पर उसे अभी मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की मंजूरी नहीं मिली है। इसके लिए मेडिकल कालेज प्रशासन जुलाई में आवेदन करेगा।
इसके बाद कौंसिल की टीम आकर सर्वे और निरीक्षण करेगी। उसे सब कुछ ठीकठाक और मानक के मुताबिक मिला तभी वह मंजूरी/एनओसी देगी। हाल ही में एनसीआई ने उत्तर प्रदेश के 20 मेडिकल कालेजों को मंजूरी देने से हाथ खींच लिए हैं।
कई कालेजों में नए बैच की अनुमति नहीं दी है। इनमें कांशीराम गवर्मेंट ऐलोपैथिक कालेज, जालौन और गवर्मेंट मेडिकल कालेज, कन्नौज शामिल हैं। इसी तरह कई मेडिकल कालेजों को एमबीबीएस सीटें बढ़ाने की मंजूरी नहीं दी।
बांदा मेडिकल कालेज को भी अभी एमसीआई की मंजूरी मिलना बाकी है। गौरतलब है कि हर साल एमसीआई जुलाई में टीमों से मेडिकल कालेजों का सर्वे कराती है। नियमों के मुताबिक कम से कम छह माह ओपीडी का रिकार्ड जरूरी है। इसके अलावा 20 एकड़ से कम भूमि नहीं होनी चाहिए।
मेडिकल कालेज प्रिंसिपल डॉ.आरपी सिंह ने बताया कि जुलाई माह में एमसीआई में मंजूरी के लिए आवेदन किया जाएगा। उसी के बाद टीम यहां सर्वे करने आएगी। एमसीआई ही तय करती है कि मेडिकल कालेज में ट्रेनिंग का माहौल है या नहीं।