बांदा। मौसम की तरह आजकल बीमा कंपनियां भी बेइमान हो रहीं हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में करोड़ों रुपये प्रीमियम वसूलने के बाद भी किसानों को क्लेम नहीं मिल पा रहा है। खरीफ सीजन में खराब हुई फसलों के एवज में अभी तक 393 किसानों को ही 36 लाख का व्यक्तिगत क्लेम मिला है। इधर, रबी में ओलावृष्टि ने फसलों को बर्बाद कर दिया। इसका क्लेम कब और कितना मिलेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
खरीफ वर्ष 2023 में जिले के 46628 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 43008 हेक्टेयर फसल का बीमा कराया। इसमें 43208 ऋणी व 3420 गैर ऋणी किसान शामिल हैं। बीमा कंपनी यूनीवर्सल जनरल इंश्योरेंस ने किसानों से प्रीमियम के रूप में चार करोड़ 66 लाख 93 हजार 87 रुपये वसूल किए। बीमा कंपनी को केंद्रांश व राज्यांश के रूप में सरकारों ने 13 करोड़ 17 लाख 2 हजार 612 रुपये दिए। कुल 17 करोड़ 84 लाख 19 हजार 208 रुपये प्रीमियम लेने के बाद भी कंपनी किसानों को क्लेम के नाम पर धेला नहीं देना चाहती है।
सितंबर में बेमौसम बारिश से 25 फीसदी से अधिक किसानों की फसल बर्बाद हो गई। 600 से अधिक किसानों के दावा किया, लेकिन अभी तक बीमा कंपनी ने महज 393 किसानों के मामलों का निस्तारण कर 36 लाख का व्यक्तिगत क्लेम दिया। अन्य के मामले लंबित पड़े हैं। इधर, ओलावृष्टि से नरैनी, बबेरू, पैलानी में फसलों को खासा नुकसान हुआ है। कंपनी ने अभी तक किसी भी पीड़ित किसान को एक रुपये क्षतिपूर्ति नहींं दी है।
नुकसान की चौथाई भी नहीं होती भरपाई
किसान नेताओं का कहना है कि बीमा कंपनियों ने अंधेरगर्दी कर रखी है। यही वजह है कि कई किसानों को उनके नुकसान की चौथाई भी भरपाई नहीं मिलती है। किसी किसान दो हजार तो किसी-किसी को पांच-पांच सौ रुपये तक मुआवजे के नाम दिए जाते हैं। इसकी कोई जांच भी नहीं कराई जाती है। बैंक वाले भी लिखापढ़ी में कुछ कहने से कतराते हैं।
ये हैं विसंगतियां
-बीमा कंपनी नुकसान के आकलन में मनमानी करती हैं, नुकसान को घटा दिया जाता है।
-किसानों को क्षतिपूर्ति देने में अनावश्यक देरी। सालों बीत जाते है क्लेम नहीं मिलता।
-क्लेम में समानता नहीं है किसी को कम तो किसी को ज्यादा क्लेम दिया जाता है।
-बुआई कम होने 25 फीसदी क्षतिपूर्ति राशि देकर बीमा कवर खत्म कर दिया जाता है।
-50 फीसदी नुकसान पर तत्काल 25 फीसदी राशि देने के नियमों का पालन नहीं होता।
-बीमा कंपनी के अधिकारी बिना किसान को बताए सर्वे का काम करते हैं।
क्लेम की जांच कराए प्रशासन
भाकियू नेता बलराम तिवारी का कहना है कि प्रधानमंत्री के नाम से योजना है तो इसमें पूरी पारदर्शिता भी होना जरूरी है। प्रशासन को इसकी भी जांच करानी चाहिए कि किसानों को उसके नुकसान का कितना मुआवजा मिला है। अभी तक खरीफ फसल के नुकसान का कई किसानों को क्लेम तक नहीं मिला है।
ठगा सा महसूस करता है किसान
पिपरगवा के किसान राम गोपाल का कहना है कि अक्सर मौसम की मार किसानों पर पड़ती है। ऐसे में बीमा कराने वाले किसानों की संख्या भी बढ़ी है, लेकिन जब क्लेम हाथ में आता है तो किसान खुद को ठगा सा महसूस करता है। कंपनियों को चाहिए वह किसानों के नुकसान की उचित भरपाई करे।
वर्जन...
कंपनी ने खरीफ फसल के नुकसान का क्लेम देना शुरू कर दिया है। 393 किसानों को 36 लाख व्यक्तिगत क्लेम दिया है। क्राॅप कटिंग के आधार पर जो क्लेम बना है, वह जल्द दिया जाएगा। -रवि कुमार, कोआर्डिनेटर पीएम फसल बीमा, बांदा