अहमदाबाद (गुजरात) से पदयात्रा करते हुए जैन तीर्थ सम्मेद शिखर, मधुबन (झारखंड) जा रहे जैन धर्म गुरु आचार्य जय सागर महराज शनिवार को बांदा पहुंचे। जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित किया। कहा कि स्वभाव में सरलता और सहजता लाए बिना जीव का कल्याण नहीं हो सकता।
दिगंबर जैन मंदिर में जैन अनुयायियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने अंदर के कुविचारों का त्याग किए बगैर अपने अंदर शांति का अनुभव नहीं कर सकता। जिस तरह बालक मां की ममता के साथ ही तृप्त होता है, उसी प्रकार भावों की निर्मलता के साथ मनुष्य अपने अंदर की शांति को तृप्त करेगा।
आचार्य ने कहा कि कोई भी मनुष्य क्रोधी होकर संपन्नता प्राप्त नहीं कर सकता। धन की प्राप्ति भौतिक सुख तो दे सकती है पर आत्मिक सुख नहीं। आचार-विचार से ही व्यक्ति महान बनता है। धन, रूप तो अहंकार देता है। आचार्य जयसागर के साथ आए शुभम कीर्ति महराज ने भी धर्मसभा को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि आत्मिक शांति के लिए क्रोध का त्याग जरूरी है। धर्म सभा में नगर पालिका परिषद अध्यक्ष विनोद जैन, जैन समाज के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार जैन, मीडिया प्रभारी प्रमोद कुमार सहित महेंद्र कुमार, सुरेशचंद्र जैन, लाला सनत कुमार, प्रकाशचंद्र, महिला मंडल से ऋषि जैन, मणिका जैन (इंदौर), अलका जैन (ग्वालियर), सत्यवती जैन (एटा), बाल मंडल से झलक, ऐशना आदि मौजूद रहे।