नेत्र परीक्षण शिविर में मौजूद स्कूल वाहनों के चालक।
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स्वास्थ्य शिविर में स्कूल वाहन चालकों के नेत्र परीक्षण के साथ वाहन चलवा कर शारीरिक क्षमता का आंकलन किया गया। जिसमें 146 में 9 वाहन चालकों की आंखें कमजोर मिली तो एक की आंखों में मोतियाबिंद पाया गया। चिकित्सकों ने चश्मा और आपरेशन की सलाह दी है। परिवहन विभाग अधिकारियों ने स्कूल संचालकों को वाहनों के नियम बताए।
रविवार को संभागीय परिवहन कार्यालय में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में सेंटमैरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, विद्यावती निगम मेमोरियल पब्लिक स्कूल, सरस्वती विद्या मंदिर, सेंट जेवियर, तथागत ज्ञान स्थली सीनियर सेकेंडरी स्कूल के वाहन चालकों का नेत्र परीक्षण किया गया।
जिला अस्पताल के नेत्र सर्जन डा.शिव प्रसाद गुप्ता ने बताया कि शिविर में 146 वाहन चालकों की आंखों की जांच की गई। इनमें 9 की आंखे कमजोर पाई गईं। उन्हें चश्मा लगवाने की सलाह दी गई। एक चालक मोतियाबिंद ग्रस्त मिलने पर उसे आपरेशन की सलाह दी गई।
शिविर में एआरटीओ वीरेंद्र सिंह ने स्कूल संचालकों को ड्राइवरों को तरोताजा रखने के टिप्स दिए। बताया कि स्कूल वाहन में बड़े अक्षरों में आगे व पीछे ‘स्कूल वाहन’ या अनुबंधित वाहनों पर ‘स्कूल आन ड्यूटी’ लिखा होना चाहिए। हरेक स्कूल वाहन पर स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर जरूर दर्ज कराएं।
वाहन चालक का लाइसेंस व्यवसायिक और कम से कम पांच साल पुराना होना चाहिए। परमिट, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र वैध हों। बसों में क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठना चाहिए। तेज रफ्तार से बस चलाकर बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले चालक को छह माह की कैद और एक हजार रुपये जुर्माना हो सकता है। शिविर में एआरटीओ (प्रवर्तन) सुरेश कुमार आदि उपस्थित रहे।