शबरी संस्था ने वर्ष 2013 का ‘प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान’ प्रख्यात कथाकार और कावित्री नीलेश रघुवंशी को दिया है। इसी तरह वर्ष 2014 का यह सम्मान मशहूर कथाकार अल्पना मिश्र को सौंपा गया है।
इन दोनों साहित्यकारों को यह सम्मान रविवार को कंफर्टइन सभागार में आयोजित समारोह में दिया गया। नीलेश को उनके उपन्यास ‘एक कस्बे के नोट्स’ के लिए दिया गया है जबकि अल्पना मिश्र को उनके चर्चित उपन्यास ‘अन्हियारे तलछट में चमका’ के लिए मिला है। 21,000 रुपये के साथ मान पत्र और शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ साहित्यकार शिवमूर्ति और चर्चित कवि मंगलेश डबराल ने दोनों साहित्यकारों को यह सम्मान सौंपा। दोनों उपन्यासों में समकालीन जीवन के गव्यात्मक यर्थाथ की सूक्ष्म पड़ताल की गई है। पुरस्कृत की गई इन लेखिकाओं पर डॉ.नीरज खरे और अखिलेश चमन ने विस्तार से चर्चा की।
समारोह में वरिष्ठ आलोक वीरेंद्र यादव ने उपन्यासों की अंतर्वस्तु में समाहित ठहरे हुए यथार्थ के बरक्स गतिशील दुनिया के संघर्ष की आहट के रूप में रेखांकित किया। दोनों कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं पर कई संदर्भवान अनुभव साझा किए।
अध्यक्षता कर रहे कहानीकार शिवमूर्ति ने समकालीन संकटों को रेखांकित करते हुए रचना की महत्वपूर्ण दात्यिवों/जवाबदेहियों की अवश्यकता पर बल दिया। कवि गद्यकार मंगलेश डबराल ने कहा कि नीलेश का कथानुभव बहुत मासूम है। यह मासूमियत पूरी रचना में विन्यस्त है। ‘अन्हियारे तलछट में चमका’ पर कहा कि यह उपलब्ध सामाजिक ढांचे को तोड़ता है। इसकी भाषा बहुत समृद्ध है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ.रंजना सैराहा ने किया। प्रमोद सैराहा ने अभार जताया। शबरी संस्था के सचिव मयंक खरे सहित सीए विजय गुप्ता, प्रदीप लाल, चंद्रपाल कश्यप, रणवीर सिंह चौहान आदि शामिल रहे।