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एनजीटी में 14 अप्रैल को पेश होंगे डीएम

Wed, 25 Mar 2015 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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अवैध खनन के मामले में यूपी-एमपी सरकारों और बांदा के जिला प्रशासन तथा खनिज ठेकेदारों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का शिकंजा फिलहाल कसता जा रहा है।
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ताजे आदेश में एनजीटी बेंच ने बांदा डीएम को 14 अप्रैल को ट्रिब्यूनल के सामने पेश होने का आदेश दिया है। यहां के खनिज विभाग ने अवैध खनन के मामले में जारी की गई 24 नोटिसों पर किसी खननकर्ता ने जवाब नहीं दिया है।

समाजसेवी ब्रजमोहन यादव (उदयपुर) द्वारा अवैध खनन के खिलाफ दायर की गई याचिका में पिछले वर्ष से एनजीटी लगातार सुनवाई कर रही है। इसी माह 13 और 19 मार्च को एनजीटी में उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने जानकारी दी कि सभी अवैध खननकर्ताओें को नोटिस जारी की जा चुकी हैं, पर कोई हाजिर नहीं हुआ।
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एनजीटी ने सभी को पुन: नोटिस जारी करते हुए उन्हें तामील कराए जाने के आदेश दिए। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोई हाजिर न होने पर छतरपुर डीएम को पुन: नोटिस जारी की गई। 19 मार्च की सुनवाई में एनजीटी को सरकार के वकील ने बताया कि अवैध खनन करने वाले 24 लोगों को नोटिस जारी की गई हैं, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।

इस पर एनजीटी ने पुन: नोटिस जारी करने के आदेश दिए। बांदा और छतरपुर के डीएम को नोटिस तामील कराने की जिम्मेदारी देते हुए तामीली रिपोर्ट भेजने का भी आदेश दिया। एनजीटी बेंच ने बांदा डीएम को आदेश दिया है कि 12 मार्च को दाखिल किए गए हलफनामा के सिलसिले में डीएम 14 अप्रैल 2015 को ट्रिब्यूनल के सामने उपस्थित हों। 

बालू ठेकेदार पर वन विभाग का मुकदमा
बांदा। वन क्षेत्र में बालू का खनन नदी में अस्थायी पुल निर्माण कर लेने पर वन विभाग ने बालू ठेकेदार नीरजा सिंह (लखनऊ) के विरुद्ध अपने यहां वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसमें 10 हजार रुपये जुर्माना या दो वर्ष की जेल अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।

वन रक्षक (बांदा रेंज) बब्बू सिंह की तहरीर पर बालू ठेकेदार नीरजा सिंह पत्नी स्वर्गीय शैलेंद्र सिंह, निवासी गोमती नगर, लखनऊ के विरुद्ध वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2 (37) और धारा 2/51 के तहत मामला पंजीकृत किया है।

इसमें कहा गया है कि छेहरावं वन ब्लाक में 100 मीटर परिधि में निवास कर रहे राज्य पक्षी सारस का प्राकृतिक वास नष्ट किया जा रहा है। केन पर पीपे का पुल बना रास्ता बनाकर ट्रकों-ट्रैक्टर से बालू की निकासी की जा रही है। पुल के समीप केन में सैकड़ों की संख्या में राज्य पक्षी सारस निवास करते थे। पूरे वर्ष यहां रहते थे।

बालू खनन में लगी पोकलैंड एवं जेसीबी मशीनें और वाहनों के शोरगुल से राज्य पक्षी का प्राकृतिक निवासी नष्ट हो रहा है। सारस पलायन कर रहे हैं। वन रक्षक के इस मुकदमे पर क्षेत्रीय वनाधिकारी (बांदा रेंज) ने भी मुहर लगा दी है। पता चला है कि वन विभाग ने आरोपी से 10 अप्रैल तक स्पष्टीकरण मांगा है।

खनन सूचना भ्रामक देने का आरोप
अवैध खनन मामले में आरटीआई अधिनियम के तहत दी गई दोहरी भ्रामक सूचनाओं में खनिज अधिकारी पर आरटीआई एक्टिविस्ट अशीष सागर दीक्षित ने निशाना साधा है।

आरटीआई में खनिज अधिकारी ने अशीष सागर को पिछले वर्ष अप्रैल माह में दी गई सूचना में बताया था कि केन नदी में चार खनन पट्टाधारकों को हाईकोर्ट ने मशीन से खनन कराने की अनुमति दी है जबकि पिछले माह 25 फरवरी 2015 को खनिज अधिकारी द्वारा दी गई सूचना में कहा है कि हाईकोर्ट ने पट्टाधारक मनोज तिवारी और प्रकाशचंद्र द्विवेदी के लिए आदेश दिया था।

आशीष ने खनिज अधिकारी पर अवैध खनन में मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जगदीश प्रसाद निषाद की रिट पर हाईकोर्ट ने मशीनाें के इस्तेमाल और बाधित अवधि पर रोक लगा दी है। इसके बाद भी मशीनें चल रही हैं। आशीष ने आरोप लगाया कि खनिज अधिकारी खुद बालू की खदानें अवैध रूप से चलवा रहे हैं।

एनओसी से ज्यादा बालू निकाली जा रही है। उधर, खनिज अधिकारी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि कोर्ट के आदेशों और नियम-कानूनों पर ही खनन हो रहा है।

अवैध खनन से खेत हो रहा बंजर
भदावल (बदौसा) निवासी अनुसूचित जाति इंद्रजीत पुत्र रामआसरे ने जिलाधिकारी से बालू का अवैध खनन करने वालों की शिकायत की। कहा कि बागै नदी किनारे उसकी तीन बीघा जमीन है। नदी से बालू का अवैध खनन करा रहे माफियाओं के ट्रैक्टरों धमाचौकड़ी से खेत धूल में तब्दील हो गया। मना करने पर माफिया जेल भेजने व जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष भी बालू चोरों का ही साथ दे रहे हैं।
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