बांदा। जनरल सर्जन समेत कई महत्वपूर्ण चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल में अब हृदय रोग विशेषज्ञ का पद भी नए साल पर खाली हो गया। जनपद में इकलौते कॉर्डियोलॉजिस्ट के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद अब हृदय रोगियों को इलाज के लिए महानगरों की दौड़ लगाना होगी। यहां स्वीकृत कुल 27 पदों में मात्र 14 चिकित्सक तैनात हैं। 13 चिकित्सकों के पद खाली हैं। मेडिकल कालेज में भी कॉर्डियोलॉजिस्ट पद रिक्त है।
कोरोना संक्रमण काल में शासन की मंशा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की जरूर है, लेकिन यहां डाक्टरों का भारी टोटा मरीजों पर भारी पड़ रहा है। जिला अस्पताल में जनरल सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट और चेस्ट फिजीशियन के पद लंबे अरसे से रिक्त हैं। अब पैथालॉजिस्ट और हृदय रोग विभाग भी चिकित्सकों से खाली हो गया। दो दिन पूर्व दो डाक्टरों के सेवानिवृत्त होने के बाद इन विभागों में कोई डाक्टर नहीं है।
खासकर जनपद में मात्र एक हृदय रोग विशेषज्ञ के सेवानिवृत्त होने पर दिल के रोगियों को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना होगा। मेडिकल कालेज में भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में हृदय रोगियों को मामूली इलाज के लिए कानपुर, लखनऊ, झांसी और प्रयागराज भागना पड़ेगा। इससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। यहां कुल स्वीकृत 27 पदों में फिजीशियन, बाल रोग, एनेस्थेटिस्ट, अस्थि रोग, ईएनटी, नेत्र सर्जन और डेंटल आदि विशेषज्ञों के 14 पद भरे हैं।
आठ विभागों के 13 पद खाली हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.उदयभान सिंह ने बताया कि रिक्त पदों पर डाक्टरों की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। विभागीय उच्चाधिकारियों से भी लगातार पत्राचार हो रहा है। हार्ट स्पेशलिस्ट की शीघ्र नियुक्ति के प्रयास किए जा रहे हैं।