इंटरलाकिंग सिग्नल सिस्टम चेक करते डिप्टी स्टेशन मास्टर।
- फोटो : अमर उजाला
चालू होने के 10 दिन में 20 बार फ्लाप हुआ इलेक्ट्रानिक इंटर लाकिंग सिग्नल सिस्टम। नतीजतन लाइन क्लीयर न होने से ट्रेनें आउटर पर ही रोक दी गईं। सुपरफास्ट समेत कई पैसेंजर ट्रेनें लेट हुईं। रेलवे की तकनीकी टीम फिलहाल गड़बड़ी तलाशने में जुटी हुई है।
लगभग 1.54 करोड़ लागत से इलेक्ट्रानिक इंटर लाकिंग सिग्नल सिस्टम की शुरुआत इसी माह 17 मार्च को हुई थी। उद्घाटन के मौके पर वरिष्ठ मंडल सिग्नल अभियंता अमित गोयल ने कहा था कि इसमें ब्लाक व सिग्नल के फेल होने की कोई गुंजाइश नहीं है, लेकिन उनका यह दावा बेदम साबित हुआ। 10 दिन में यह सिस्टम लगभग 20 बार फेल हो चुका है। 19 मार्च को बांदा-खैरार का ब्लाक धोखा दे गया। बांदा-झांसी पैसेंजर ट्रेन एक घंटे तक स्टेशन पर खड़ी रही।
22 मार्च को प्वाइंट नंबर 202 का ब्लाक फेल हो गया। कानपुर इंटर सिटी ट्रेन 25 मिनट आउटर में रोके रखी गई। 23 मार्च को प्वाइंट नंबर 201 का ब्लाक जवाब दे गया और चंबल एक्सप्रेस 20 मिनट तक स्टेशन में खड़ी रही। 25 मार्च को प्वाइंट नंबर 201 के फेल होने से झांसी-इलाहाबाद पैसेंजर ट्रेन आउटर पर खड़ी रही। इसी दिन शाम को प्वाइंट नंबर 202 दो बार फेल हुआ। झांसी-बांदा पैसेंजर टे्रन व मालगाड़ी प्रभावित हुई। चालकों की सूचना पर अधिकारियों ने मैनुअल व्यवस्था के तहत झंडी दिखाकर ट्रेनों को अप-डाउन किया। स्टेशन प्रबंधक बीपी वर्मा ने बताया मैकेनिकल विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मरम्मत कार्य में लगे हुए हैं। जल्द खामियों को ठीक कर लिया जाएगा। नई व्यवस्था में थोड़ी बहुत दिक्कतें आती रहती हैं।