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छात्रा की दरियादिली से पड़ोसियों की आंखें नम

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ヤजुटाए पैसों से पड़ोसी के लिए खरीद सामग्री के साथ छात्रा कुमारी सोनम।ヤ - फोटो : BANDA
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बांदा। लॉकडाउन से पैदा हुए हालात ने तंगहाल लोगों के लिए हमदर्दी के रास्ते खोल दिए हैं लेकिन जो खुद परेशानहाल हो और फिर दरियादिली दिखाए तो उसकी हौसलाअफजाई लाजमी है। ऐसी ही बानगी है राजकीय महिला डिग्री कालेज में एमए फाइनल वर्ष की छात्रा सोनम।
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सोनम शहर के बन्यौटा मोहल्ले में दो छोटी बहनों और विधवा मां के साथ रहती है। पिता रामबहोरी घड़ा मटका बेचा करते थे। पांच साल पहले कैंसर से उनकी मौत हो गई। अब सोनम अपनी मां जनकदुलारी और छोटी बहनों के साथ घर में सिलाई और गोलगप्पे बनाकर अपनी और बहनों की पढ़ाई व घर का खर्च चला रही है। लॉकडाउन के बाद कॉलेज बंद है।
कॉलेज की यूथ फ्रेंडली क्लीनिक की नोडल अधिकारी व प्रवक्ता डॉ. सबीहा रहमानी छात्राओं का व्हाट्स एप ग्रुप बनाकर ऑनलाइन कक्षा चला रही हैं। उन्होंने मौजूदा विषम हालात में छात्राओं को परेशानहाल जरूरतमंद पड़ोसियों की मदद की प्रेरणा दी। गुरु की प्रेरणा से सोनम ने दरियादिली का नायाब नमूना पेश किया है।
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अपनी गाढ़ी कमाई से बचाकर गुल्लक में जुटाए ढाई सौ रुपये निकाल लिए और बिस्कुट, साबुन, चाय और कुछ अन्य खाद्य सामग्री खरीदकर इसे गरीब, परेशानहाल पड़ोसी आशा और मंगल को सौंप दी। लेने और देने वाले दोनों ही की आंखें खुशी में नम हो गईं। प्रवक्ता डॉ. सबीहा रहमानी बताती हैं कि कॉलेज की छात्राओं प्रियंका गुप्ता, आफरीन निशां, कहकशां मंसूरी, पूजा यादव, प्रीति, संध्या, कुलसुम, शीलू यादव आदि ने भी पॉकेटमनी से जरूरतमंदों की मदद की है।
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