बांदा। मां-बाप का साया सिर से छीन लेने के गुनहगार को फांसी के फंदे तक मृतकों की मासूम बेटी ने ही पहुंचाया। मां-बाप और भाइयों के कातिल को मासूम नान्सी चाचा कहती थी। उसके हाथों से मरने से बच निकली नानसी ने भागकर नजदीक रहने वाली अपनी भाभी उर्मिला को बताया था- भाभी, कक्का और अम्मा का गोलू चाचा मार डारिस हवै। बेहद सहमी नान्सी ने भाभी से कहा था कि उसे बचा ले। नान्सी उस समय पहली कक्षा में पढ़ती थी। अदालत में चले मुकदमे के दौरान भी बच्ची की चश्मदीद गवाही चर्चित रही। अदालत में गवाही के दौरान बच्ची को कुर्सी पर खड़ा करके न्यायाधीश ने गवाही सुनी थी। धरती पर खड़े होने से न्यायाधीश उसका चेहरा नहीं देख पा रहे थे। नान्सी ने अदालत में वह सब कुछ बेबाकी से बयां कर दिया जो उसने अपनी आंखों से देखा था। चौहरे हत्याकांड में राजनीति भी खूब हुई थी। विभिन्न दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों का कई दिन तक मृतक महादेव के घर तांता लगा रहा था।
पैतृक गांव छोड़कर महादेव यहां बसा था
पड़ोसी स्वजातीय की दरिंदगी का शिकार महादेव यादव मूलरूप से बिसंडा थाना क्षेत्र के अमलिहा पुरवा (सिंहपुर) का रहने वाला था। घटना से तीन दशक पहले वह गांव छोड़कर यहां आ बसा था। दूध के कारोबार के साथ बरातों में घोड़ा भी नचाता था। उसका बड़ा बेटा अवध नरेश उसका हाथ बटाता था। पुत्र पवन और राजकुमार (मृतक) कान्वेंट स्कूल में पढ़ते थे। महादेव तीन भाई थे। तीनों भाइयों के मकान आसपास बने हैं।
जेवर का कारीगर है हत्यारा
पड़ोसी दंपति और उनके बच्चों का हत्यारा अमित यादव उर्फ गोलू घटना के चार माह पहले सूरत से लौटा था। वह वहां फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड था। यहां अपने पिता शारदा, मां देवा और बड़े भाई अनिल उर्फ राजू और भाभी साधना के साथ रहता था। गोलू आभूषण बनाने का अच्छा कारीगर है। वह यहां यही काम करता था। घटना के बाद आसपास यह चर्चा थी कि सूरत से लौटने के बाद गोलू यह शक हुआ कि उसके परिवार की एक महिला से महादेव के अवैध संबंध हैं। गोलू ने कई बार रोका टोका भी था। घटना से एक पखवारा पहले दोनों के बीच इसी बात पर विवाद भी हुआ था। गोलू ने अपने घर की महिला की पिटाई भी की थी। इससे नाराज महिला अपने दोनों बच्चों को लेकर मायके चली गई थी।