व्हीकल एक्ट में कोई प्रावधान न होने की बात कहकर परिवहन विभाग ने भले ही बख्श दिया हो लेकिन नगर पालिका परिषद ने बैटरी चालित ई-रिक्शों का अपने यहां पंजीकरण करने का फैसला किया है। साथ ही हरेक रिक्शा से 500 रुपये सालाना टैक्स वसूला जाएगा।
इससे नगर पालिका की सालाना आमदनी में साढ़े 5 लाख रुपये सालाना का इजाफा हो जाएगा। ई-रिक्शों का संचालन हाल ही शुरू हुआ है। कोई रजिस्ट्रेशन या शुल्क न होने से इनकी कुछ महीनों में ही शहर में बड़ी तादाद हो गई है। हर रोज कुछ नए रिक्शे खरीद कर सड़कों पर फर्राटे मार रहे हैं।
तमाम रिक्शों के चालक नाबालिग भी हैं। परिवहन विभाग यह कहकर पल्ला झाड़े हुए है कि मोटर व्हीकल एक्ट में ई-रिक्शा को काई जिक्र नहीं है। लिहाजा उनका फिलहाल न तो रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है और न ही चालान। उधर, ट्राफिक पुलिस भी चुप्पी साधे है।
बांदा शहर में लगभग 1100 बैट्री रिक्शा दिन रात चल रहे हैं। इसके अलावा अतर्रा, नरैनी और बबेरू नगर में भी ई-रिक्शा सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। रिक्शा चालक यात्रियों से मनमानी किराया वसूल रहे हैं। मामूली दूरी पर भी 20 रुपये से कम नहीं लिए जा रहे।
ई-रिक्शों की भरमार के बाद नगर पालिका परिषद, बांदा में इनका पंजीकरण करने और 500 रुपये सालाना टैक्स वसूलने का फैसला किया है। बोर्ड की बैठक में इसे पारित किया गया है। यह मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही लागू होगा। पटल प्रभारी नवल बाबू ने बताया कि नगर पालिका में जल्द ही पंजीकरण शिविर लगाया जाएगा।
500 रुपये शुल्क के अलावा पट्टिका और फार्म आदि के 100 रुपये अतिरिक्त लिए जाएंगे। इसके अलावा इक्का, तांगा, मैन्युअल रिक्शा और हाथ ठिलिया का भी पंजीकरण होगा। पिछले वर्ष नगर पालिका मेें करीब 1760 रिक्शा चालकों ने लाइसेंस शुल्क जमा किया था। उधर, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद जैन ने बताया कि शुल्क न जमा करने वाले ई-रिक्शा चालकों पर जुर्माना किया जाएगा।