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दो निशान, दो प्रधान के विरोधी थे मुखर्जी

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Mukherjee was opposed to two marks, two heads. - फोटो : BANDA
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बांदा। जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का कहना था कि एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे। यही नारा जनसंघ के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए संकल्प का जुमला बन गया।
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यह बात भाजपा जिलाध्यक्ष रामकेश निषाद ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर दक्षिण मंडल कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में कही। मुखर्जी के चित्र पर फूल चढ़ाकर दीप जलाते हुए श्रद्धांजलि दी गई। जनपद के हरेक बूथ में यह आयोजन हुआ। गोष्ठी में महामंत्री कल्लू सिंह राजपूत, उपाध्यक्ष ममता मिश्रा, जागृति वर्मा, शैलेंद्र जायसवाल, डॉ. मनीष गुप्ता, दिलीप गुप्ता, मोहित गुप्ता, अरविंद चंदेल, शिवशंकर भोले और राजीव सिंह आदि उपस्थित रहे।
उधर, तिंदवारी में आयोजित गोष्ठी में मीडिया प्रभारी आनंद स्वरूप द्विवेदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने सत्ता की लालसा के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रीय पुर्ननिर्माण के उद्देश्य से जनसंघ की स्थापना की। मंडल अध्यक्ष देवा त्रिपाठी, सुधीर दत्त, मिलेश मिश्रा, बड़े लाल सिंह, अरुण पटेल, अनिल सक्सेना, राज अनुरागी आदि शामिल रहे।
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