बांदा। बाबुल के आंगन में एक साथ पली-बढ़ी दो बहनों की घर की ड्योढ़ी से दो अर्थियां निकली तो ग्रामीणों की आंखें भर आईं। बेहद गमगीन माहौल में परिजनों ने पैतृक गांव में दोनों बहनों का अंतिम संस्कार कर दिया। नवविवाहिता को पति ने तो बहन को दादा (ताऊ) ने मुखाग्नि दी। उधर, पिता व भाई की हालत गंभीर है। 24 घंटे बाद भी कोई सुधार नहीं आया।
मंगलवार को हादसे में नवविवाहिता और उसकी बहन की मौत के बाद बुधवार को पैतृक गांव कोदा का पुरवा में दोनों बहनों का अंतिम संस्कार हुआ। पुरवा से कुछ दूर पर स्थित श्मसान घाट में अलग-अलग चिताएं बनाई गईं।
घर की महिलाओं ने नवविवाहिता रंजना के शव का सोलह श्रृंगार किया। लाल रेशमी साड़ी में लिपटे शव को देखकर मां बेटइयां देवी दहाड़ मारकर रो पड़ी। घर की महिलाओं ने उन्हें संभाला और सांत्वना दी। श्मसान घाट पति अशोक कुमार ने उसे मुखाग्नि दी। उधर, रंजना के शव के बगल में ही सुधा की भी चिता बनाई गई। दादा (ताऊ) वृंदावन कुशवाहा ने उसे मुखाग्नि दी। चाचा रणजीत सिंह कुशवाहा के मुताबिक रंजना की ससुराल से पति अशोक कुमार समेत तमाम लोग अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद बघौली (एटा) गांव लौट गए। 17 फरवरी (शुक्रवार) को पति अस्थियां लेने आएंगे और उसी दिन संगम (इलाहाबाद) में अस्थियां विसर्जित करेंगे। बताया कि अंतिम संस्कार के बाद अन्य सभी कार्यक्रम एटा में होंगे। उधर, कानपुर में भर्ती मृतका रंजना व सुधा के पिता रामसागर व भाई राजाबाबू की हालत गंभीर बनी हुई है। राजाबाबू की एक आंख भी खराब हो गई है।