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मंदिरों में देवी जयकारे तो मजलिसों में मातम

Sun, 18 Oct 2015 11:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बांदा। देवी दुर्गा अगर शक्ति की प्रतीक हैं तो शहीदाने कर्बला भी बहादुरी की मिसाल हैं। दुर्गा ने दैत्यों का संहार किया तो कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने जालिम बादशाह यजीद की फौज को शिकस्त दी। धर्म और मजहब से जुड़े यह दोनों अवसर इन दिनों एक साथ याद किए जा रहे हैं। दुर्गा महोत्सव और मोहर्रम शहर में सांप्रदायिक सौहार्द का बेमिसाल नमूना बने हुए हैं।
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कौमी एकता के लिए हमेशा सराहे जाने वाले बांदा शहर में इन दिनों हिंदू-मुसलिम एकता के शानदार नमूने देखे जा रहे हैं। मंदिरों में देवी के जयकारे लग रहे हैं तो मोहर्रम की मजलिसों में मातम हो रहा है। शहर में जगह-जगह सजे सैकड़ों दुर्गा पंडालों से रोजाना रात में ताजिये गुजर रहे हैं। नवरात्र और मोहर्रम के पहले दोनों के करता धरताओं ने बैठक कर तय किया था कि दोनों पर्वों पर कोई किरकिरी नहीं पैदा होने दी जाएगी।

 मिलजुल कर मनाएंगे। दोनों ही पक्ष अपने वादों पर खरे उतर रहे हैं। शनिवार की रात अंसारी बिरादरी का ताजिया जुलूस निकला। मनोहरीगंज, कोतवाली रोड आदि कई स्थानों पर देवी पांडालों से गुजरा। देवी भक्तों ने ताजिए का सम्मान किया। डीजे बंद कर दिए। उधर, ताजियेदारों ने भक्तों की भावनाओं का एहतराम किया और अपने ढोल-ताशे बंद कर दिए। मोहर्रम कमेटी पदाधिकारी वहीद, डा. शोएब और साबिर चौधरी और नवदुर्गा महोत्सव समिति के महामंत्री अमित सेठ भोलू व अभिषेक पांडेय आदि मौजूद रहे। दोनों ही आयोजकों ने उम्मीद जताई कि नवरात्र और मोहर्रम के बचे चंद दिन भी इसी मेल-मोहब्बत के साथ निपट जाएंगे।
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