बांदा। खनिज विभाग को खोखली खदानों से लक्ष्य पूरा करना मुश्किल पड़ जाएगा। छह माह में करीब साढ़े तीन अरब रुपये जुटाने की चुनौती है। इस वर्ष शासन ने चार अरब रुपये का लक्ष्य रखा है। खदान संचालकों ने नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाकर भारी भरकम मशीनों से तीन माह में ही खदानें खोखली कर डालीं। अक्तूबर से 6 माह के लिए फिर खनन शुरू होगा।
बालू से खाली खदानों पर खदान ठेकेदार न दांव लगाएंगे न दाम। अवैध खनन और ओवर लोडिंग की शिकायतों की यहां झड़ी लगी रही। अंतत: अब खनिज निदेशक ने यहां के जिला खान अधिकारी सुभाष सिंह को निलंबित कर दिया है। उन्हें निदेशालय से अटैच किया गया है। खनिज अधिकारी पिछले साल जुलाई में ही यहां आए थे। एक साल में उन पर लगातार आरोप लगते रहे। अपने साथ खनिज विभाग की भी छवि धूमिल की। शायद उनकी इसी कार्यप्रणाली का नतीजा है कि शुरुआती तीन महीनों में भी लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 16 फीसदी रायल्टी/राजस्व जुट पाया।
नए खनिज अधिकारी को शेष छह माह (अक्तूबर से मार्च तक) में शेष लक्ष्य तीन अरब 35 करोड़ 35 लाख जुटाना खासा चुनौती भरा होगा। उधर, खदानों में बालू खत्म हो जाने से पट्टाधारक हाथ खड़े करते जा रहे हैं। रायल्टी नहीं जमा कर रहे। अपनी करोड़ों रुपये जमा सिक्योरिटी राशि भी जब्त हो जाने की उन्हें परवाह नहीं है। अब खनन पहली अक्तूबर से शुरू होगा, लेकिन यह पट्टाधारक खोखली खदानों पर दांव और दाम लगाने के मूड में नहीं है। भले ही खनिज विभाग को उनकी सिक्योरिटी जब्त कर लेने पर ही संतोष करना पड़ेगा।
तीन माह में जुटाए 64.65 करोड़
चालू वित्तीय वर्ष में मार्च से जून तक खनिज विभाग में 64 करोड़ 65 लाख 67 हजार 729 रुपये राजस्व जुटाया है। इसमें सबसे ज्यादा 57 करोड़ 47 लाख 3 हजार 352 रुपये बालू रायल्टी/नीलामी से आमद हुई है। इसके अलावा पत्थरों से एक करोड़ 78 लाख 77 हजार 552 रुपये मिले हैं। जुर्माना और शमन के रूप में चार करोड़ 52 लाख 50 हजार 950 रुपये जुटाए गए हैं। कार्यदायी संस्थाओं आदि से 87 लाख 35 हजार 875 रुपये आमद हुई है।