डाकघरों में अपनी गाढ़ी कमाई जमा कर आरडी खाता खोलने वालों की जमा पूंजी में लाखों रुपये के घपले का अंदेशा है। खाताधारकों द्वारा आरडी की पूरी किश्तें जमा करने के बावजूद कंप्यूटर खाते में उनका पैसा कम दिख रहा है।
जिले के करीब आठ हजार से ज्यादा खाता धारकों के खातों में 8 से 10 हजार रुपये का घपला सामने आया है। आरडी मेच्योर होने के बाद भी उन्हें भुगतान के लिए पांच-छह माह से पोस्ट आफिसों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
चित्रकूटधाम मंडल में करीब साढ़े चार लाख से ज्यादा आवर्ती (आरडी) खाताधारक हैं। एजेंटों के माध्यम से अथवा सीधे तौर पर लोग हर माह आरडी जमा कर रहे हैं, लेकिन जब से प्रधान डाकघर कोर बैकिंग सुविधा (सीबीएस) से जुड़े हैं, तब से इन खाता धारकों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
खाताधारकों ने पांच साल तक किश्तें जमा कीं, लेकिन अब आरडी मेच्योर होने के बाद उनकी कई किश्तें कंप्यूटर में शो नहीं कर रही हैं। किसी के खाते में आठ हजार गायब हैं तो किसी के 10 हजार रुपये कम हैं। घपले में पड़ी इस रकम के बाबत अधिकारी और कर्मचारी कहते हैं कि बाद में इसका भुगतान हो जाएगा।
उधर, कई खाताधारकों ने बताया कि उनका खाता पिछले वर्ष अक्तूबर व नवंबर में पूरा हो गया था, लेकिन भुगतान नहीं किया जा रहा है। डाक अधीक्षक कार्यालय में फाइल स्वीकृत के लिए धूल फांक रही हैं। कई एजेंटों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भुगतान में भी कमीशन का खेल चल रहा है।
कमीशन न देने पर बाबू घपला कर देते हैं। खाता धारकों का आक्रोश उन्हें झेलना पड़ रहा है। इस संबंध में डाक अधीक्षक, एसआर पाल ने कहा कि सीबीएस सिस्टम हाल ही में शुरू हुआ है। इसके रुटीन में आने में समय तो लगता ही है।
कर्मचारियों की लापरवाही के चलते कंप्यूटर में पूरी किश्तें शो नहीं कर रही हैं। इसको सुधारा जा रहा है। किसी भी खाताधारक का पैसा रह नहीं जाएगा। उनका भुगतान हर हाल में किया जाएगा।