गर्मी का कहर, हीट स्ट्रोक की मार
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बांदा। राजकीय मेडिकल कालेज में मरीजों का ग्राफ तेजी से घट रहा है। बीते दो महीने में दो सौ मरीज कम हो गए हैं। मेडिकल कालेज प्रशासन इसके पीछे बारिश और बिजली की अव्यवस्था बता रहे हैं। जबकि मरीजों का मोह सुविधाएं न मिलने से हो रहा है। जून में मेडिकल कालेज के ओपीडी में रोजाना लगभग 700 मरीजों की आमद हो रही थी लेकिन बाद में धीरे-धीरे कई सुविधाएं कम होने और चेकअप की सुविधा न मिलने से मरीजों का मोह यहां से भंग होने लगा। अब स्थिति यह है कि लगभग पांच सैकड़ा मरीज ही आ रहे हैं। बांदा के अलावा जिले की सरहद से जुड़े पन्ना, सतना और छतरपुर के मरीज भी मेडिकल कालेज आ रहे थे। इनमें भी कमी आई है। मेडिकल कालेज में अभी भी एक्सरे, अल्ट्रासाउंड इत्यादि सुविधाएं नहीं हैं। मरीजों की विभिन्न जांचों के लिए पैथालाजी भी पर्याप्त नहीं है।
उधर, मरीजों की कमी के पीछे मेडिकल कालेज प्राचार्य कुछ और ही दलील देते हैं। प्राचार्य डा. सुनील कुमार आर्या का कहना है कि बारिश से भी मरीजों की संख्या घटी है। हालांकि प्राचार्य की बात गले नहीं उतरती। यह मौसम बीमारियों का है। जिला अस्पताल और अन्य सरकारी-गैर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भरमार है। ऐसे में मेडिकल कालेज में इस मौसम में मरीजों के घटने की वजह बारिश बताना हास्यास्पद है। अलबत्ता प्राचार्य बिजली की अव्यवस्था को भी मरीजों की कमी का एक मुख्य कारण बता रहे हैं। उनका यह तर्क किसी हद तक सच है। पावर कारपोरेशन मेडिकल कालेज से भरपूर पैसा ले लेने के बावजूद भी कालेज का अलग फीडर नहीं बना पाया। ग्रामीण फीडर से आपूर्ति दी जा रही है। यह आए दिन ठप रहती है। बिन बिजली मेडिकल कालेज में मरीजों की जांच नहीं हो पा रही। प्राचार्य का कहना है कि इन अव्यवस्थाओं और समस्याओं से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।