बांदा। महिलाओं के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना जिले में फिसड्डी साबित हो रही है। इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष में महज 2100 महिलाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन तो कराया है, लेकिन उनके खातों में योजना की निर्धारित पांच हजार रुपये की धनराशि नहीं पहुंची है। जिम्मेदारों का कहना है कि मामला प्रक्रिया में चल रहा है, जल्द ही खातों में पैसा भी पहुंच जाएगा।
बता दें कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में शासन ने जिले को 11,148 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन कराने का लक्ष्य दिया गया था। इसमें से सिर्फ 2100 रजिस्ट्रेशन कर शासन को उनकी रिपोर्ट भेजी जा रही है। लक्ष्य पूरा करने के लिए विभाग अब ब्लॉक वार शिविर लगाने की तैयारी कर रहा है। योजना संचालन के लिए जनपद को प्रदेश में 58 वां स्थान मिला है। इसको लेकर भी जिम्मेदारों के हाथ-पांव फूले हुए हैं।
यह है मातृ वंदन योजना
- केंद्र सरकार की तरफ से देश में प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना (पीएमवीवाई) संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत हर घरेलू महिला को पहले बच्चे के जन्म पर पांच हजार रुपये का अनुदान मिलता है। यह अनुदान गर्भधारण से बच्चे के जन्म के बाद पहले टीकाकरण तक तीन किश्तों में दिया जाता है।
- यह होनी चाहिए पात्रता
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजन (पीएमएमवीवाई) के अंतर्गत जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य संबंधी विशिष्ट शर्तों की पूर्ति पर परिवार में पहले जीवित बच्चे के लिए गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के खाते में सीधे 5,000 रुपये की नकद राशि प्रोत्साहन स्वरुप प्रदान की जाती है।
- ऐसे करें योजना के लिए आवेदन
सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना (पीएमएमवीवाई) के लिए आवेदन प्रक्रिया को एक मोबाइल ऐप और एक समर्पित पोर्टल (पीएमएमवीवाईसॉफ्ट एमआईएस) की शुरुआत करके पूर्णतया डिजिटाइज़ कर दिया है, जिससे आवेदन की प्रक्रिया पेपरलेस हो गई है। पीएमएमवीवाई-सॉफ्ट एमआईएस का यूआरएल https://pmmvy.wcd.gov.in है।
वर्जन
- जिले में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना के लश्र्य को पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। जिन 2100 महिलाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है, शर्त पूरी होने पर उन्हें शासन की ओर से धनराशि भेजी जाएगी।
आरके त्रिपाठी, डिस्ट्रिक प्रोगाम मैनेजर, बांदा।
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना की प्रगति काफी धीमी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक ब्लॉक में 19 जनवरी से 15 फरवरी तक एक अभियान चलाकर शिविरों के माध्यम से लक्ष्य को पूरा किया जाएगा। -डॉ. आरएन प्रसाद, एसीएमओ, बांदा।