बांदा। कोरोना केस लगातार सामने आने के बाद शासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी इससे निपटने की कवायदें शुरू कर दीं। मंगलवार को मॉकड्रिल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को परखा गया। हालांकि इस दौरान कई स्वास्थ कर्मी बिना मास्क के ही दिखाई दिए।
रानी दुर्गावती मेडिकल काॅलेज में डब्ल्यूएचओ की नोडल अधिकारी डा.मीनाक्षी ने व्यवस्थाएं परखीं। एंबुलेंस से बेड तक मरीज को पहुंचने में लगने वाले समय और ऑक्सीजन व्यवस्था का जायजा लिया। हालांकि मॉकड्रिल के दौरान कई स्वास्थ्य कर्मी बगैर मास्क थे। उन्हें कोरोना नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए। प्रधानाचार्य डा.एसके कौशल समेत वरिष्ठ चिकित्सक शामिल रहे।
जिला अस्पताल परिसर में स्थित 200 बेड के मंडलीय चिकित्सालय में अपर निदेशक डा.वीपी द्विवेदी ने स्वास्थ्य सेवाएं परखीं। ऑक्सीजन प्लांट चालू करके देखा। वेंटीलेटर, ऑक्सीजन कंसलट्रेटर, बेड आदि का निरीक्षण किया। दावा किया कि एंबुलेंस से मरीज के आने पर स्ट्रेचर के जरिए बेड तक पहुंचाने पर करीब 12 से 15 मिनट का समय लगेगा। इसके अलावा एल-1 अस्पताल घोषित बबेरू, नरैनी, अतर्रा व बहेरी सीएचसी में भी कोविड से निपटने की तैयारियां देखी गईं।
कोविड-19 नोडल अधिकारी डा.प्रसून खरे ने बताया कि मंगलवार को कोरोना संक्रमित कोई नया केस नहीं मिला। अब तक जिले में 13 सक्रिय मरीज हैं। एक संक्रमित के ठीक होने पर उसे घर भेज दिया गया है।