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पटाखों ने उजाड़ दिए कई घर, पीड़ितों ने बयां किया दर्द

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बांदा। पटाखों के निर्माण और बिक्री मेें जरा सी चूक परिवार और पड़ोसियों का घर उजाड़ देती है। कई साल पहले जिले में हुए दो बड़े हादसे इसकी बानगी हैं। तबाही मचाने वाली ऐसी घटनाओं की संभावनाएं दीपावली पर काफी बढ़ जाती है। पटाखों के धमाकों में अपना घर परिवार उजाड़ बैठे लोग दीपावली के मौके पर अपने दर्द को महसूस करते हुए जिले के लोगों को पटाखों से परहेज की सीख दे रहे हैं। ऐसे ही कुछ प्रभावितों से बातचीत।
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बिसंडा के हादसे में गईं थीं चार जानें
बिसंडा कस्बे में बबेरू रोड पर दिसंबर 2018 पटाखों से भीषण दुर्घटना हुई थी। देशराज पटेल के मकान में नफीस की आतिशबाजी की दुकान थी। रात को अचानक आतिशबाजी में आग लग गई। पटाखों के विस्फोट से पक्का मकान ध्वस्त हो गया। मलबा दूर-दूर तक हवा में उड़ा। दुकान में काम करने वाले भाई शाहरुख (18) और सलमान (20) पुत्रगण सुलेमान तथा रामफल (15) पुत्र देवीचरण और शिवलखन (25) की मौके पर ही मौत हो गई। एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था।
ओरन के धमाके में हुईं थी दो मौतें
ओरन नगर में बुद्धराज प्रजापति के मकान में आतिशबाजी का कारोबार होता था। नवंबर 2014 को शाम को अचानक आतिशबाजी में आग लग गई और भीषण धमाकों के साथ पूरा मकान धराशायी हो गया। इस हादसे में शंभू प्रजापति (25) पुत्र बुधराज निवासी (ओरन) और एक अन्य की मौत हो गई थी। दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना को याद कर आज भी लोग सिहर जाते हैं। लोगों का कहना है कि ऐसी घटना फिर न हो, इसके लिए हम सभी खास सतर्कता रखनी चाहिए।
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बिसंडा हादसे में मरे रामफल की मां प्रेमा (बिसंडा) का कहना है कि दीपावली या अन्य मौकों पर पटाखों के धमाके सुनते ही बेटे को गवां देने का दर्द ताजा हो जाता है। पटाखे बहुत खराब चीज है। लोग इससे इससे बचें। जन-धन दोनों की हानि हो सकती है। किसी और मां को बेटा न गंवाना पड़े।
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