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लट्ठबाजों ने दीवारी नृत्य से बांधा समां

Fri, 13 Nov 2015 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा।
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बांदा। बुंदेलखंड के मशहूर दीवारी नृत्य की परीवा पर धूम रही। लाठी चलाने और खुद को बचाने की कला देखने के लिए हुजूम उमड़ पड़ा। रंग-बिरंगी पोशाक में ग्रामीणों ने हैरतनाक करतब दिखाए। उधर, सहेवा गांव में अपारदाता साईं आश्रम में दीवारी प्रतियोगिता में घोड़ा नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा।
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दीपावली के दूसरे दिन गुरुवार को दीवारी नृत्य की धूम रही। ढोल-नगाड़े की गूंज के बीच लाठी चलानेे की कला का प्रदर्शन हुआ। हाथों में मोर पंख लिए मौनिया नाचते और कूदते रहे। महेश्वरी देवी मंदिर में दर्जनों गांवों की टीमों ने मत्था टेककर दीवारी और पाई डंडा नृत्य प्रदर्शन किया। देर शाम तक चौराहा दर्शकों की भीड़ से खचाखच रहा। उधर, विंध्यवासिनी मंदिर खत्री पहाड़ में दिवारी नृत्य में टीमों को सम्मानित किया। सपा वरिष्ठ महिला नेता अमिता वाजपेयी ने स्मृति चिन्ह सौंपे। अक्षय वाजपेयी ने टीम अध्यक्षों को सम्मानित किया। कार्यक्रम व्यवस्थापक अरुण शुक्ला, संयोजक राम निषाद, प्रमोद पांडेय, राजकुमार शुक्ला, लवलेश यादव, बद्री निषाद, सुरेंद्र अवस्थी, गंगी मिश्रा, विक्रमादित्य, शारदा पांडेय आदि मौजूद रहे। संचालन निरंजन शुक्ला ने किया।

उधर, साईं दाता आश्रम में क्षेत्र की एक दर्जन दीवारी टीमों ने रंग-बिरंगे परिधान में ढोलक की थाप पर लाठियों का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। दीवारी प्रतियोगिता में रमेश पाल (बड़ोखर खुर्द), दीवान यादव (निजामत पुरवा), रामखेलावन (अतर्रा), रामभगेश (जमरेई) समेत गुमाई, सहेवा, बिलगांव, अजीतपारा आदि टीमों ने कारनामे दिखाए। छोटकू-बड़कू (खप्टिहा) ने मंझीरे पर मनमोहक नृत्य किया। लल्लूराम शुक्ल (चित्रकूट) ने बुंदेलखंडी गीत गाया। साधु कुशवाहा व भुजबल यादव (महावीर का पुरवा) ने घोड़ा नृत्य के जरिये समां बांध दी। आयोजक जेपी यादव ने कलाकारों को पुरस्कृत किया। कृषि विश्वविद्यालय कुलसचिव राजबहादुर यादव (कानपुर) व देवीदास (बांदा) समेत डॉ.चंद्रिका प्रसाद दीक्षित 'ललित, समाजसेवी गोपाल भाई, सपा पूर्व जिलाध्यक्ष इम्तियाज खां आदि उपस्थित रहे। संचालन रामसेवक यदुवंशी व राकेश शर्मा ने किया। उधर, नरैनी, बबेरू, तिंदवारी, कमासिन, मरका, अतर्रा, कालिंजर, करतल, मटौंध, जसपुरा, खप्टिहा कलां, चिल्ला प्रतिनिधियों के मुताबिक गांवों में दीवारी नृत्य की धूम रही। मोर पंख लिए मौनिए ढोल-नगाड़ों में थिरकते रहे। मंदिरों में पूजन के बाद प्रसाद बांटा।
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