फोटो - 15 जंगल में मौजूद बाघ। स्त्रोत : विभाग
करतल। बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का गवाह बना है। इस रिजर्व में बाघों की आबादी 100 के आंकड़े को पार कर गई है, जो कि संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी सफलता को दर्शाता है। हालांकि इस सफलता के साथ ही बाघों के लिए निवास स्थान (हैबिटेट) की कमी जैसी नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। जिसके कारण बाघों को रिहायशी इलाकों में प्रवेश करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
पन्ना टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,600 वर्ग किमी है। अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में बाघों की जो संख्या है, उसके लिए यह क्षेत्र अब पर्याप्त नहीं है। स्थान की कमी के कारण बाघों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं बढ़ गई हैं। इन संघर्षों में बाघों की मौत के आंकड़े भी बढ़े हैं। जिससे 100 से अधिक बाघों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसके अलावा सीमित वन क्षेत्र के कारण मानव-पशु संघर्ष और पारिस्थितिक असंतुलन की चिंताएं भी गहरी हो गई हैं।
उप क्षेत्र संचालक वीरेंद्र पटेल ने बताया कि बाघों के निवास में सुधार के लिए पानी की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत नए तालाबों और वाटर होल का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही बाघों के लिए अनुकूल घास के मैदानों को भी विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। रिजर्व के विस्तार को लेकर केन-बेतवा लिंक परियोजना से नई उम्मीदें जगी हैं। इस परियोजना के तहत विस्थापित होने वाले गांवों की भूमि को उच्च गुणवत्ता वाले घास के मैदानों में परिवर्तित करने की योजना है। जिससे बाघों को अतिरिक्त सुरक्षित क्षेत्र मिल सके।