सफाईकर्मी के लिए आवेदन जमा करने आया एलएलबी डिग्री धारक विजय पाल।
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बांदा। बेरोजगारी ने युवाओं का बुरा हाल कर रखा है। जिन युवाओं ने वकालत के लिए पढ़ाई की, अब वे सड़कों की सफाई करने को भी तैयार हैं। कई उच्च शिक्षा हासिल करने वाले बेरोजगार भी हाथों में झाड़ू थामने की लाइन में हैं। इसकी बानगी इन दिनों सफाई कर्मियों की भर्ती के लिए किए जा रहे आवेदन में नजर आ रही है।
अर्जुनाह (महुआ) गांव का विजय पाल एमए, बीएड और एलएलबी डिग्रीधारक है। टीईटी पास कर शिक्षक बनना चाहा तो मेरिट ने बाहर कर दिया। वकालत की प्रैक्टिस में कुछ रस नजर नहीं आया। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। विजय पाल का कहना है कि मरता, क्या न करता। सफाई कर्मचारी की नौकरी मिल जाएगी तो घर का खर्च चल जाएगा।
महुआ गांव की गीता साहू बीए, बीएड और आईटीआई है। नौकरी के लिए तीन साल से भटक रही है। घर के हालात और अपना जीवन बेहतर बनाने के लिए उसे सड़कों पर सफाई करने से भी परहेज नहीं है। उसने आवेदन जमा कर दिया है।
प्रधान डाक घर में सफाई कर्मचारी के लिए आवेदन जमा करने वालों की लंबी लाइन में एक-दो नहीं बल्कि अच्छी खासी संख्या में उच्च शिक्षित और डिप्लोमा और डिग्री धारक शामिल हैं। कुछ ने तो अपना नाम उजागर न करते हुए छलछलाई आंखों से कहा कि कभी सोचा भी नहीं था कि उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद सफाईकर्मी की नौकरी के लिए आवेदन करना पड़ेगा।