नवाब टैंक में पितृ विसर्जन पर तर्पण करते श्रद्धालु।
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बांदा। ‘नघावम इति रूपेण त्वमेव जनादन:’ तं दृष्टवा पुंडीरकाक्षाय मुच्चियते च ऋण त्रयाप्’ मंत्रों के साथ शुक्रवार को पितृ पक्ष के अंतिम दिन नदी-तालाबों में जल तर्पण किया गया। गरीबों, कौओं, कुत्तों व गाय को भोजन कराकर पितरों को तृप्त किया।
जल, तिल व भोजन से तृप्त होकर पुरखे बुधवार को विदा हो गए। नवाब टैंक समेत शहर व ग्रामीण इलाकों के तालाबों व नदियों में पितृ विसर्जन करने वालों की खासी भीड़ रही। तड़के से तिल, जवा व जल से तर्पण और पिंडदान किया गया। कुशा-पैंती से पुरखों का विसर्जन किया। सुपारी, तिल दूब का दान किया।। पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ पितृ विसर्जन कराया।