बांदा। भारत की कम्युनिस्ट पार्टियों के साझा प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को यहां के गांवों का भ्रमण कर सूखे का जायजा लिया। उन्होंने यहां की स्थिति बहुत गंभीर बताई। अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भी देंगे। 19 मई को सभी वामपंथी दल की संयुक्त बैठक में इस मुद्दे पर अगली रणनीति बनाई जाएगी।
सीपीआई के राज्य सचिव डॉ.गिरीश, सीपीआई (एम) के राज्य सचिव डॉ.हीरालाल यादव, सीपीआई (एमएल लिबरेशन) के राज्य सचिव रामजी राय और फारवर्ड ब्लाक के शिवनारायण सिंह चौहान तथा एसयूसीआई (सी) के जगन्नाथ वर्मा ने मटौंध आदि क्षेत्रों के कुछ गांवों का भ्रमण किया।
उन्होंने बताया कि सूखे की वजह से अकाल के हालात हैं। यहां आधे से ज्यादा आबादी रोजी की खोज में पलायन कर गई है। वामपंथी नेताओं ने पेयजल, सिंचाई और हर परिवार को दो रुपये किलो हर माह 50 किलो राशन, सभी कर्जों की माफी, मनरेगा के कामों मेें तेजी और मौके पर मजदूरी का भुगतान, वैकल्पिक रोजगार और बुंदेलखंड के छात्र-छात्राओं की फीस माफी की मांग की। पशुओं के लिए चारा, पानी और मनरेगा में 300 रुपये मजदूरी पर 200 दिन काम की वकालत की। सूदखोरी पर भी लगाम लगाने को कहा।
वामपंथी नेताओं ने जिला अस्पताल मेें स्वास्थ्य परीक्षण कराने आए मृतक दलित नत्थू के परिजनों से भी मुलाकात की। उनके लिए जमीन का पट्टा, आवास और 10 लाख रुपये मदद की मांग की। प्रतिनिधिमंडल के साथ स्थानीय वामपंथी नेता मुकुल सिंह, अरविंद राजस्वरूप, ईश्वरीय प्रसाद कुशवाहा, रमेश सिंह सेंगर, सुधीर सिंह, रामचंद्र सरस, दुर्योधन, रामप्रवेश यादव और डॉ. केवल सिंह आदि शामिल रहे।